आज लगभग हर व्यक्ति यह जानना चाहता है कि बेस्ट म्यूच्यूल फंड्स कौन से हैं नेक्स्ट कौन सा स्टॉक अच्छा परफॉर्म करेगा और पैसा सबसे जल्दी कैसे ग्रो किया जाए। सबको लगता है कि जितनी जल्दी पैसा बढ़े उतना अच्छा। लेकिन बहुत कम लोग यह समझते हैं कि आप सिर्फ एक इमरजेंसी दूर हैं बैंककरप्ट होने से। यही वह सच्चाई है जिसे नजरअंदाज कर दिया जाता है। Emergency Fund इसी समस्या का सीधा और जरूरी समाधान है। अगर आपने इमरजेंसी के लिए प्लान नहीं किया तो आपकी पूरी फाइनेंशियल जर्नी कभी भी एक झटके में खत्म हो सकती है।
इमरजेंसी क्यों बन सकती है बैंककरप्सी की वजह
लेटेस्ट रिपोर्ट्स के अनुसार 71 प्रतिशत लोग जो कंपनियों में काम करते हैं, हॉस्पिटल का खर्चा अपनी जेब से देते हैं। अगर एक भी लंबा हॉस्पिटलाइजेशन उनका या उनके परिवार का हो गया तो पूरी सेविंग एक झटके में खत्म हो सकती है। और यह सिर्फ हॉस्पिटलाइजेशन की बात नहीं है। इमरजेंसी किसी भी रूप में आ सकती है। कल को कोई लीगल इशू हो सकता है नौकरी चली जा सकती है घर में कोई अनएक्सपेक्टेड खर्चा आ सकता है या कोई पर्सनल इमरजेंसी सामने आ सकती है। अगर इन सभी के लिए पहले से प्लान नहीं किया गया तो ज्यादातर इंडियंस कभी भी बैंककरप्ट हो सकते हैं।
मेडिकल इंश्योरेंस काफी क्यों नहीं है
कुछ लोग यहां यह कह सकते हैं कि मेडिकल इमरजेंसी के लिए तो हेल्थ इंश्योरेंस होता है और वही काफी है। लेकिन जो बाकी इमरजेंसी हैं जैसे नौकरी जाना लीगल इशू या अन्य पर्सनल समस्याएं उनके लिए कोई इंश्योरेंस मार्केट में मौजूद नहीं है। इसलिए इन सभी अनिश्चित परिस्थितियों के लिए एक अलग फंड तैयार करना पड़ता है जिसे Emergency Fund कहा जाता है।
फाइनेंशियल जर्नी की पहली प्राथमिकता
जब भी फाइनेंशियल जर्नी शुरू करनी हो तो सबसे पहले Emergency Fund बनाना चाहिए। उससे पहले यह नहीं सोचना चाहिए कि बेस्ट म्यूच्यूल फंड कौन सा है या बेस्ट स्टॉक कौन सा है। इमरजेंसी फंड बनाना सबसे ज्यादा जरूरी कदम है। अब सवाल यह आता है कि यह फंड कैसे बनाया जाए कितना बड़ा होना चाहिए और इसे रखा कहां जाए। इन्हीं सवालों के जवाब आगे समझते हैं।
Emergency Fund कितना बड़ा होना चाहिए
कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आपके पास छह महीने का खर्चा है तो आपका Emergency Fund काफी है। उदाहरण के तौर पर अगर आपका एक महीने का खर्चा 25 हजार है तो उसे छह से मल्टीप्लाई करने पर लगभग डेढ़ लाख का फंड बनता है। लेकिन यहां कुछ चीजें मिसिंग हैं। Emergency Fund पर्सनल फाइनेंस का एक बेसिक टॉपिक है और यह हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। किसी के लिए छह महीने का खर्चा सही है किसी के लिए बारह महीने का और किसी के लिए अठारह महीने का।
सही साइज कैसे तय करें
सबसे अहम सवाल यह है कि कितने महीने का फंड होने से आपको पीस ऑफ माइंड मिलेगा। हो सकता है किसी को छह महीने का फंड होने पर ही मानसिक शांति मिल जाए लेकिन कुछ लोग ज्यादा कंजर्वेटिव होते हैं और उन्हें कम से कम बारह महीने का फंड चाहिए होता है। एक बहुत बड़ा पॉइंट जो अक्सर मिस हो जाता है वह यह है कि अगर आप अपने बैंक स्टेटमेंट के हिसाब से पूरा खर्चा जोड़कर उसे छह बारह या अठारह से मल्टीप्लाई कर देंगे तो जो अमाउंट निकलेगी वह अनरियलिस्टिक होगी।
बेसिक खर्चे पर फोकस क्यों जरूरी है
अभी आपकी सैलरी आ रही है और आप उसमें से घर का खर्च, बाहर खाना, कपड़े ट्रिप्स जैसी चीजों पर पैसा खर्च कर रहे हैं। लेकिन इमरजेंसी के वक्त यह खर्चे नहीं होंगे। अगर आपकी नौकरी चली जाती है तो आप शॉपिंग या घूमने नहीं जाएंगे। इसलिए Emergency Fund सिर्फ आपके बेसिक खर्चों के आधार पर बनना चाहिए। अगर आपकी इनकम 50 हजार है लेकिन बेसिक जरूरतों के लिए आप 30 से 35 हजार खर्च करते हैं तो उसी अमाउंट को छह बारह या अठारह से मल्टीप्लाई करना चाहिए। इससे एक रियलिस्टिक नंबर मिलेगा और स्ट्रेस भी नहीं बढ़ेगा।
क्या Emergency Fund सभी इमरजेंसी कवर कर लेता है
अक्सर देखा गया है कि एक ही इमरजेंसी लोगों की पूरी सेविंग खत्म कर देती है। कई ऐसे उदाहरण हैं जहां सालों की बचत एक झटके में खत्म हो गई। यहां लोग यह सोच सकते हैं कि उनके पास कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस है। लेकिन आज के समय में नौकरी का कोई भरोसा नहीं है। इसलिए सिर्फ कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर रहना सही नहीं है। एक इंडिविजुअल या फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस होना बहुत जरूरी है वह भी किसी भी इन्वेस्टमेंट प्लानिंग से पहले।
हेल्थ इंश्योरेंस की भूमिका
बहुत से लोग इंश्योरेंस लेना चाहते हैं लेकिन मार्केट में शोर इतना है कि कवर कितना लें कौन सा प्लान सही है, यह समझ नहीं आता। ऐसे में इंडियाज लार्जेस्ट हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी स्टार हेल्थ इंश्योरेंस का जिक्र किया गया है। इसके साथ लगभग हर तरह के हॉस्पिटल कवर हो जाते हैं और कैशलेस क्लेम की सुविधा मिलती है। इनके कई प्लान्स हैं जिनमें सुपरस्टार और अशोर प्रमुख हैं। सुपरस्टार प्लान में अनलिमिटेड कवर और फ्रीज योर एज जैसी सुविधा मिलती है जबकि अशोर प्लान में दो करोड़ तक का कवर नौ फैमिली मेंबर्स और मैटरनिटी कवर शामिल है।
Emergency Fund कैसे बनाना शुरू करें
अब सवाल यह है कि इतना बड़ा Emergency Fund बनाया कैसे जाए। इसकी प्लानिंग आपको अपनी पहली या दूसरी सैलरी से ही शुरू करनी चाहिए। सबसे पहले अपने इंश्योरेंस प्लान करें और उसके बाद Emergency Fund की प्लानिंग करें। म्यूच्यूल फंड और स्टॉक्स बहुत बाद में आते हैं।
सैलरी से सेविंग की रणनीति
आप अपनी मंथली सैलरी से एक फिक्स्ड अमाउंट हर महीने सेव कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर आपको 50 हजार की सैलरी मिलती है तो आप 20 या 25 तारीख को 10 हजार रुपये की स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन दे सकते हैं ताकि वह सीधे दूसरे अकाउंट में चला जाए। अगर आपके ऊपर ईएमआई है तो पहले उसे प्रायोरिटी दें और जो भी बचता है उसे सेव करने की कोशिश करें।
Emergency Fund कहां रखें
यह जानना बहुत जरूरी है कि Emergency Fund कहां रखा जाए। इसके लिए तीन शर्तें बहुत जरूरी हैं। पहला फंड वॉलेटाइल नहीं होना चाहिए। दूसरा जरूरत पड़ने पर पैसा तुरंत उपलब्ध होना चाहिए। तीसरा यह फंड कम से कम इंफ्लेशन को बीट कर सके।
सही ऑप्शंस का चयन
इन शर्तों के हिसाब से इक्विटी म्यूच्यूल फंड्स और स्टॉक्स बाहर हो जाते हैं क्योंकि वे बहुत वॉलेटाइल होते हैं। ऐसे में तीन ऑप्शंस बचते हैं। सेविंग अकाउंट एफडी या आरडी और डेट फंड्स। सेविंग अकाउंट और एफडी का कॉम्बिनेशन इसलिए अच्छा है क्योंकि सेविंग अकाउंट से लिक्विडिटी और स्टेबिलिटी मिलती है और एफडी से बेहतर रिटर्न। ऑटो स्वीप सुविधा के जरिए बैलेंस लिमिट से ऊपर जाते ही पैसा एफडी में कन्वर्ट हो सकता है। इसके लिए एक अलग सेविंग अकाउंट रखना बेहतर है।
लिक्विड फंड्स की भूमिका
डेट फंड्स में अल्ट्रा लो ड्यूरेशन लो ड्यूरेशन और लिक्विड फंड्स जैसे ऑप्शंस होते हैं। Emergency Fund के लिए लिक्विड फंड्स बेहतर माने जाते हैं। इनमें करीब सात प्रतिशत के आसपास रिटर्न मिल सकता है और वॉलेटिलिटी भी कम होती है। इनका सेटलमेंट T+1 होता है यानी आज रिक्वेस्ट डालने पर कल पैसा मिल जाता है। अगर बहुत ही इमरजेंसी हो तो बीच में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
एफडी और लिक्विड फंड दोनों क्यों
कई लोग सोचते हैं कि जब एफडी ज्यादा रिटर्न देती है तो लिक्विड फंड्स में पैसा क्यों लगाया जाए। वजह यह है कि लिक्विड फंड्स का रिटर्न समय के साथ बदल सकता है। पहले के वर्षों में लिक्विड फंड्स ने नौ से दस प्रतिशत तक का रिटर्न दिया है। इसलिए पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करना जरूरी है और दोनों में निवेश करना समझदारी है।
कैश और गोल्ड का महत्व
एक अहम बात जो अक्सर एक्सपर्ट्स भी नहीं बताते वह यह है कि आपके Emergency Fund का 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा कैश या गोल्ड कॉइन के रूप में होना चाहिए। भले ही कैश पर रिटर्न न मिले और गोल्ड कॉइन सुरक्षित न लगे लेकिन अगर कभी एटीएम काम न करें साइबर अटैक हो जाए या डिजिटल ट्रांजैक्शन बंद हो जाए तो यही कैश और गोल्ड सबसे ज्यादा काम आएगा। भले ही यह स्थिति 1 प्रतिशत ही हो, लेकिन Emergency Fund प्लान करते वक्त उस 1 प्रतिशत के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
Ideal Emergency Fund Allocation
एक बेहतर स्ट्रक्चर यह हो सकता है कि 50 से 60 प्रतिशत पैसा अलग सेविंग अकाउंट में हो जिसमें ऑटो स्वीप सुविधा चालू हो। 30 से 35 प्रतिशत पैसा लिक्विड या आर्बिट्राज फंड में हो और करीब 10 प्रतिशत कैश और गोल्ड के रूप में रखा जाए।
Emergency Fund से जुड़ी अहम बातें
Emergency Fund से जुड़े हर पहलू पर यहां चर्चा की गई है। यह समझना जरूरी है कि यह एक वन टाइम प्रोसेस नहीं है। हर एक से दो साल में अपने फंड को रिव्यू करना चाहिए क्योंकि लाइफस्टाइल समय के साथ बदलती रहती है। उसी हिसाब से फंड में बदलाव करना जरूरी होता है।
Emergency Fund इस्तेमाल करने के बाद क्या करें
अगर किसी कारणवश आपने अपने Emergency Fund का इस्तेमाल कर लिया है तो आपकी पहली प्राथमिकता यही होनी चाहिए कि उस फंड को फिर से भर दिया जाए। Emergency Fund इसी लिए होता है कि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जाए लेकिन इस्तेमाल के बाद उसे दोबारा बनाना भी उतना ही जरूरी है।
Conclusion
Emergency Fund प्लानिंग में हेल्थ इंश्योरेंस को एक अहम हिस्सा मानना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो एक ही झटके में सारी सेविंग खत्म हो सकती है। Emergency Fund से जुड़ा हर पहलू यहां कवर किया गया है। सही साइज तय करना सही जगह रखना और समय-समय पर रिव्यू करना ही इस पूरी प्रक्रिया का सार है।














