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Highway Toll में Invest कैसे करें? | InvIT Investment से 2026 में शानदार Passive Income

On: January 6, 2026 6:16 PM
InviT Investment

हम लोगों ने बहुत बार सुना होगा कि सरकार हाईवे टोल से बहुत सारा पैसा कमाती है। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि वही टोल प्लाजा, जहां से रोजाना हजारों गाड़ियां गुजरती हैं, वहां से सिर्फ सरकार ही नहीं बल्कि हम और आप भी कमाई कर सकते हैं। InvIT Investment को लेकर आम तौर पर लोगों को लगता है कि यह सिर्फ बड़ी कंपनियों या सरकार के लिए होता है।

पहली नजर में यह बात अजीब लगती है और दिमाग तुरंत यही कहता है कि टोल से कमाई करना हमारे बस की बात नहीं है। लेकिन सच्चाई यह है कि सही तरीके से समझा जाए तो यह बिल्कुल संभव है। इस पूरे लेख में वही पूरा प्रोसेस स्टेप बाय स्टेप समझाया गया है ताकि आपको साफ समझ आए कि टोल प्लाजा की कमाई में हम कैसे पार्टनर बन सकते हैं और यह पूरा सिस्टम कैसे काम करता है।

आज के लेख में क्या क्या समझेंगे

आज के पूरे लेख में तीन बातें साफ साफ समझाई जाएंगी। पहली बात यह कि सिर्फ ₹100 से आप इंडिया के नंबर वन हाईवे में कैसे इन्वेस्ट कर सकते हैं। दूसरी बात यह कि टोल प्लाजा में इन्वेस्ट करके आप क्वार्टरली इनकम कितनी जनरेट कर सकते हैं। तीसरी और सबसे जरूरी बात यह कि यह सारा इन्वेस्टमेंट किस तरीके से किया जाता है। यह सारी चीजें आसान भाषा में समझाई जाएंगी ताकि आज से ही आपकी इनकम शुरू होने का रास्ता साफ हो जाए। इस पूरे लेख को पूरा पढ़ना जरूरी है क्योंकि अगर कोई भी हिस्सा मिस हुआ तो यह इन्वेस्टमेंट सही तरीके से समझ में नहीं आएगा।

टोल प्लाजा से होने वाली कमाई की असली तस्वीर

अब सबसे पहले बात करते हैं कि टोल प्लाजा पर आखिर कितना पैसा बनता है। उदाहरण के तौर पर गुजरात का अहमदाबाद बड़ोदरा एक्सप्रेस हाईवे लिया जाए। इस हाईवे से रोजाना 500 से ज्यादा छोटी बड़ी गाड़ियां गुजरती हैं। औसतन हर गाड़ी करीब ₹300 का टोल टैक्स देती है। इस हिसाब से रोजाना का कलेक्शन करीब ₹1 करोड़ 80 लाख के आसपास हो जाता है। कई बार यह इससे भी ज्यादा होता है।

अगर इसी का महीने का हिसाब लगाया जाए तो लगभग ₹54 करोड़ बनता है और साल भर में यह कलेक्शन ₹648 करोड़ के आसपास पहुंच जाता है। और यह तो सिर्फ एक छोटा सा हाईवे है। अब आप खुद सोचिए कि पूरे भारत में कितने हाईवे हैं और उन पर कितने टोल प्लाजा हैं। हर सेकंड वहां से कोई न कोई गाड़ी गुजरती है और हर सेकंड कमाई होती रहती है।

सिर्फ सरकार ही क्यों कमाए

यहां सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि इतनी बड़ी कमाई सिर्फ सरकार और टोल बनाने वाली कंपनियां ही क्यों करें। अगर हम और आप भी इन्वेस्ट करके इस कमाई का छोटा सा हिस्सा हर महीने या हर क्वार्टर अपने बैंक अकाउंट में पा सकें तो यह किसी सपने से कम नहीं लगेगा। पहली बार सुनने पर यह मजाक जैसा लगता है और दिमाग तुरंत कहता है कि ऐसा थोड़ी हो सकता है। लेकिन यह कोई मजाक या स्कीम नहीं है। यह एक पूरी तरह से रेगुलेटेड और गवर्नमेंट बैक इन्वेस्टमेंट का रास्ता है। इसे समझने की जरूरत है।

यह कोई स्कीम नहीं है

यह बहुत जरूरी है कि यहां एक बात बिल्कुल साफ हो जाए। यह कोई स्कीम नहीं है। यह सेबी रेगुलेटेड आरबीआई अप्रूवल और गवर्नमेंट बैक इन्वेस्टमेंट है। भारत में बहुत सारे लोग पहले से इसमें इन्वेस्ट कर रहे हैं और अच्छा पैसा कमा रहे हैं। पूरा सिस्टम ट्रांसपेरेंट है और अच्छी तरह ऑडिटेड है। इसलिए यहां किसी तरह का झांसा या धोखा नहीं है।

सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

2014 में भारत सरकार ने एक बड़ा वादा किया था कि देश का इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडर्न बनाया जाएगा। सड़कों का जाल बिछाया जाएगा, रेलवे, ब्रिज और बिजली से जुड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा किया जाएगा। इस काम को तेज करने के लिए सरकार ने पीपीपी मॉडल यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप को अपनाया।

2019 से 2020 के बीच सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब ₹3,500 करोड़ खर्च किए थे। वहीं 2024-26 में यह खर्च बढ़कर लगभग ₹11 लाख करोड़ से ज्यादा हो गया। यह जीडीपी का करीब 3.5 प्रतिशत हिस्सा है। इसका साफ मतलब है कि देश में हाईवे, ब्रिज और बाकी इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत तेजी से बन रहे हैं और इसके लिए लाखों करोड़ रुपये की जरूरत है।

कंपनियों को लोन नहीं पार्टनर चाहिए

जब इतने बड़े प्रोजेक्ट बनते हैं तो कंपनियां यह नहीं चाहतीं कि वे सिर्फ लोन लेकर काम करें। वे चाहती हैं कि लोगों को पार्टनर बनाया जाए और पैसा कलेक्ट किया जाए। इसी प्रोसेस से InvIT Investment की शुरुआत होती है। जब भी कोई नया हाईवे या बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनता है तो सबसे पहले इनविट बनाया जाता है।

इनविट में बड़ी बड़ी कंपनियां भी इन्वेस्ट करती हैं लेकिन सेबी के नियमों के हिसाब से 25 प्रतिशत पार्टनरशिप पब्लिक को देना जरूरी होता है। इसके बदले सभी इन्वेस्टर्स को यूनिट्स दी जाती हैं। ये यूनिट्स स्टॉक मार्केट में लिस्टेड होती हैं ताकि हम और आप जैसे लोग इन्हें खरीद सकें।

InviT पूरी तरह रेगुलेटेड सिस्टम

सेबी ने 2014 में इनविट के लिए सख्त रेगुलेशन बनाए थे। यह कोई ऐसा सिस्टम नहीं है जहां बिना नियम के पैसा लगाया जाए। यह पूरी तरह ट्रांसपेरेंट और वेल ऑडिटेड होता है। हर इनकम और खर्च का पूरा हिसाब रखा जाता है ताकि इन्वेस्टर्स का भरोसा बना रहे।

कुछ बड़े InviT के नाम

अब कुछ ऐसे इनविट के नाम समझते हैं जो भारत में काम कर रहे हैं। पहला है IRB InvIT। यह हाईवे और टोल प्लाजा में इन्वेस्ट करता है, उनका मैनेजमेंट संभालता है और वहां से टोल कलेक्ट करता है। इनके पास 15 से 20 साल तक के कॉन्ट्रैक्ट होते हैं। दूसरा है PowerGrid InvIT। यह पूरे देश में बिजली को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करता है और उसी से कमाई करता है। तीसरा है NHAI InvIT। यह पूरे भारत में नेशनल हाईवे से जुड़े प्रोजेक्ट्स को संभालता है।

InviT में पैसा लगाने पर कमाई कैसे होती है

जब हम InviT में पैसा इन्वेस्ट करते हैं तो वह पैसा सीधे प्रोजेक्ट में लगता है। उस प्रोजेक्ट से जो कमाई होती है, जैसे टोल कलेक्शन, वही कमाई इनविट के जरिए इन्वेस्टर्स में बांटी जाती है। सेबी के नियमों के अनुसार इनविट को अपनी इनकम का 90 प्रतिशत हिस्सा इन्वेस्टर्स को डिविडेंड के रूप में देना जरूरी होता है। मतलब अगर कोई इनविट महीने में ₹100 करोड़ कमाता है तो उसमें से ₹90 करोड़ इन्वेस्टर्स को डिस्ट्रीब्यूट किए जाते हैं। इसी से एक रेगुलर इनकम हमारे अकाउंट में आती है। जैसे फ्लैट से रेंट आता है वैसे ही इनविट से डिविडेंड आता है।

नंबर के जरिए इनविट को समझना

अब इसे नंबर के जरिए समझते हैं। मान लीजिए 2023-24 में किसी ने IRB इनविट में ₹1 लाख इन्वेस्ट किया। उस समय यूनिट की कीमत ₹70 थी तो लगभग 1428 यूनिट्स मिलतीं। फाइनेंशियल ईयर 23-24 में IRB इनविट ने ₹8 प्रति यूनिट के हिसाब से डिविडेंड दिया। इसका मतलब एक साल में ₹11,424 का डिविडेंड मिला यानी करीब 11 प्रतिशत रिटर्न। 2024-26 में भी इसी तरह ₹8 प्रति यूनिट के हिसाब से डिविडेंड दिया गया। बैंक की एफडी जहां 6 से 7 प्रतिशत देती है वहीं यहां 11 प्रतिशत के आसपास रिटर्न बनता है।

डिविडेंड रीइन्वेस्ट करने की ताकत

अब एक और जरूरी बात समझते हैं। अगर मिलने वाले डिविडेंड को हर साल रीइन्वेस्ट कर दिया जाए तो कंपाउंडिंग का असर दिखने लगता है। पहले साल मिले ₹11,000 के डिविडेंड को ₹70 के भाव पर रीइन्वेस्ट किया तो करीब 163 नई यूनिट मिल गईं और कुल यूनिट 1590 हो गईं। दूसरे साल इन्हीं यूनिट्स पर डिविडेंड मिला और उसे फिर से रीइन्वेस्ट किया गया तो यूनिट बढ़कर 1773 हो गईं। तीसरे साल यही प्रोसेस दोहराने पर यूनिट करीब 1975 हो गईं।

पांच साल तक इसी तरह डिविडेंड को रीइन्वेस्ट करते रहने पर यूनिट्स बढ़कर करीब 2453 हो जाती हैं और अगर यूनिट का भाव ₹70 ही रहे तो वैल्यू ₹1,71,000 के आसपास पहुंच जाती है। अगर यही प्रोसेस 10 साल तक चलता रहे तो यूनिट्स करीब 4214 हो जाती हैं और उनकी वैल्यू लगभग ₹3 लाख के आसपास पहुंच जाती है। यानी ₹1 लाख का पैसा 10 साल में तीन गुना हो जाता है और उस पर मिलने वाला डिविडेंड करीब 30 प्रतिशत रिटर्न जैसा बन जाता है।

InviT में पैसा कैसे इन्वेस्ट करें

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इनविट में पैसा इन्वेस्ट कैसे किया जाए। इसका तरीका बहुत ही सिंपल है। जैसे हम अपने डीमैट अकाउंट से स्टॉक्स खरीदते हैं, उसी तरह इनविट की यूनिट्स भी खरीदी जाती हैं।
अगर आपके पास डीमैट अकाउंट नहीं है तो आप डीमैट अकाउंट खुलवाकर इनविट खरीद सकते हैं। डीमैट अकाउंट होने के बाद आप स्टॉक मार्केट से सीधे इनविट की यूनिट्स परचेस कर सकते हैं।

InviT में रिस्क क्या है

हर इन्वेस्टमेंट में थोड़ा बहुत रिस्क होता है और इनविट भी इससे अलग नहीं है। टोल की इनकम कभी ज्यादा तो कभी कम हो सकती है। इंटरेस्ट रेट में बदलाव आ सकता है। कुछ हाईवे प्रोजेक्ट्स में देरी भी हो सकती है। इन सब वजहों से इनकम में थोड़ा बहुत उतार चढ़ाव आ सकता है। लेकिन पॉजिटिव बात यह है कि यह एसेट बैक इन्वेस्टमेंट है। इसके पीछे बड़े बड़े हाईवे और टोल प्लाजा मौजूद हैं जो कहीं जाने वाले नहीं हैं। इसलिए इन्वेस्टमेंट की सेफ्टी बनी रहती है।

देश की ग्रोथ में हिस्सेदारी

जब देश तेजी से ग्रो कर रहा होता है तब सिर्फ ऑडियंस बनकर ताली बजाना काफी नहीं होता। उस ग्रोथ में पार्टिसिपेट करना जरूरी होता है। हाईवे बन रहे हैं इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ रहा है तो उसमें हमारा भी छोटा सा हिस्सा होना चाहिए। InvIT Investment के जरिए हम देश की ग्रोथ के साथ साथ अपनी वेल्थ भी बढ़ा सकते हैं।

Conclusion

इस पूरे लेख में यही समझाया गया है कि टोल प्लाजा की कमाई में हम कैसे पार्टनर बन सकते हैं। सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर फोकस, पीपीपी मॉडल, InviT की संरचना, डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन और कंपाउंडिंग के जरिए लॉन्ग टर्म वेल्थ बनाने का पूरा प्रोसेस स्टेप बाय स्टेप बताया गया है। अगर इसे सही तरीके से समझा जाए तो यह एक ऐसा रास्ता है जहां देश की तरक्की के साथ हमारी इनकम भी बढ़ सकती है। जय हिंद जय भारत।

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