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Top 5 Midcap Funds for 2026 शानदार Midcap Investing गाइड

On: February 23, 2026 1:08 AM
Top 5 Midcap Funds

अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश की दुनिया को थोड़ा गहराई से समझना चाहते हैं तो Top 5 Midcap Funds in 2026 पर यह लेख आपके लिए पूरा और जरूरी बनने वाला है। बहुत सारे निवेशक स्मॉल कैप और लार्ज कैप के बीच कन्फ्यूज रहते हैं और यही वजह है कि मिड कैप कैटेगरी सबसे ज्यादा डिमांड में रहती है।

इस लेख में मिड कैप कैटेगरी को बिल्कुल बेसिक से समझाया गया है यहां आप जानेंगे कि मिड कैप कैटेगरी होती क्या है इसका पिछले 5-6 साल का परफॉर्मेंस कैसा रहा है वैल्यूएशन के हिसाब से यह आज सस्ती है या महंगी और आखिर में स्क्रीनर और फैक्टर मॉडल के जरिए Top 5 Midcap Funds in 2026 कैसे चुने गए हैं।

मिड कैप कैटेगरी क्या होती है

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मिड कैप कैटेगरी आखिर होती क्या है भारत की जितनी भी लिस्टेड कंपनियां हैं अगर उन्हें उनकी मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर डिसेंडिंग ऑर्डर में रखा जाए तो जो पहली 100 कंपनियां आती हैं उन्हें लार्ज कैप कंपनियां कहा जाता है इन कंपनियों की मार्केट कैप लगभग 90,000 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा होती है और ये 10 बिलियन डॉलर से ऊपर की कंपनियां होती हैं इन सभी लार्ज कैप कंपनियों की क्यूमुलेटिव मार्केट कैप करीब 260 ट्रिलियन रुपये होती है और पूरे मार्केट की लगभग 61% हिस्सेदारी इन्हीं में होती है।

इसके बाद जो कंपनियां 101वें नंबर से लेकर 250वें नंबर तक आती हैं, यानी अगली 150 कंपनियां उन्हें मिड कैप कंपनियां कहा जाता है। ये कोई छोटी कंपनियां नहीं होतीं इनकी मार्केट कैप लगभग 30,000 करोड़ रुपये से शुरू होकर लार्ज कैप की सीमा तक जाती है। इन सभी मिड कैप कंपनियों की कुल मार्केट कैप लगभग 82 ट्रिलियन रुपये होती है जो पूरे मार्केट का करीब 19% हिस्सा बनाती है।

इसके बाद जो बची हुई लगभग 2200 से ज्यादा कंपनियां होती हैं उन्हें स्मॉल कैप कहा जाता है इनकी मार्केट कैप 300 करोड़ रुपये या उससे कम होती है हैरानी की बात यह है कि इतनी सारी स्मॉल कैप कंपनियों की कुल मार्केट कैप भी लगभग उतनी ही होती है जितनी 150 मिड कैप कंपनियों की होती है यही पूरा मिड कैप यूनिवर्स है।

मिड कैप इंडेक्स का परफॉर्मेंस: स्मॉल कैप और लार्ज कैप से तुलना

अब यह समझना जरूरी है कि मिड कैप इंडेक्स ने पिछले कुछ सालों में कैसा परफॉर्म किया है इसे एक ट्रैफिक सिग्नल की तरह समझा जा सकता है जहां मिड कैप को रेड स्मॉल कैप को ग्रीन और लार्ज कैप को येलो रंग से दिखाया गया है।

2020 में कोविड के समय जो बॉटम बना था वहां से लगभग सभी इंडेक्स एक जैसे लेवल से शुरू हुए थे स्मॉल कैप थोड़ा ज्यादा गिरा था जबकि मिड कैप और लार्ज कैप लगभग बराबर गिरे थे। इसके बाद जो रैली आई उसमें लार्ज कैप यानी देश की टॉप 100 कंपनियों के इंडेक्स ने पिछले 5 सालों में लगभग 114% का कुल रिटर्न दिया। अगर स्मॉल कैप की बात करें तो उन्होंने करीब 219% का रिटर्न दिया जबकि मिड कैप कैटेगरी ने करीब 238% का रिटर्न दिया। यानी इन तीनों कैटेगरीज में ऐतिहासिक रूप से सबसे ज्यादा गेन मिड कैप कैटेगरी ने दिया है।

गिरावट के समय मिड कैप का बिहेवियर

अब एक और महत्वपूर्ण चीज समझते हैं। सितंबर 2024 के बाद जब मार्केट में तेज गिरावट आई उस समय स्मॉल कैप सबसे ज्यादा गिरा। स्मॉल कैप लगभग 25-26% तक गिर गया जबकि मिड कैप करीब 17-19% तक ही गिरा। यहां समझने वाली बात यह है कि मिड कैप स्मॉल कैप के मुकाबले कम गिरता है।

इतना ही नहीं जब मार्केट ने रिकवरी दिखाई तो मिड कैप ने उतनी ही तेजी से रिकवर भी कर लिया जितना वह गिरा था वहीं स्मॉल कैप अभी तक अपने पुराने टॉप तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया। इससे यह साफ होता है कि मिड कैप गिरते समय कम गिरता है और चढ़ते समय तेजी से अपने लेवल रिक्लेम करता है।

मिड कैप की वैल्यूएशन: सस्ती या महंगी

अब सवाल आता है कि आज के समय में मिड कैप कैटेगरी वैल्यूएशन के हिसाब से कैसी है। प्राइस टू अर्निंग यानी PE रेशियो के आधार पर देखें तो एक साल के औसत में मिड कैप का PE करीब 34.55 रहा है, जबकि अभी का PE लगभग 34 के आसपास है। यानी एक साल के हिसाब से मिड कैप थोड़ा सस्ता ट्रेड कर रहा है।

अगर दो साल और पांच साल के PE रेंज के हिसाब से भी देखें तो मिड कैप अपने एवरेज से नीचे ही ट्रेड कर रहा है इसका मतलब यह है कि लॉन्ग टर्म के नजरिए से आज भी मिड कैप कैटेगरी वैल्यूएशन के हिसाब से ठीक स्थिति में है।

स्क्रीनर के जरिए Top 5 Midcap Funds in 2026 कैसे चुने गए

अब यहां से शुरू होता है मिड कैप कैटेगरी में Top 5 Midcap Funds in 2026 चुनने का प्रोसेस। सबसे पहले मिड कैप कैटेगरी को सेलेक्ट किया गया जिसमें कुल 56 म्यूचुअल फंड स्कीम्स उपलब्ध थीं।

बीट बेंचमार्क फिल्टर

सबसे पहला नियम यह लगाया गया कि फंड को अपने बेंचमार्क को बीट करना चाहिए। एक्टिव म्यूचुअल फंड लेने का मकसद ही यही होता है। यहां टॉप 60% फंड्स रखे गए और नीचे के 40% फंड्स हटा दिए गए। इससे 56 में से करीब 28 फंड्स बाहर हो गए।

अप कैप्चर टू डाउन कैप्चर रेशियो

इसके बाद अप कैप्चर टू डाउन कैप्चर रेशियो लगाया गया। यह रेशियो बताता है कि जब इंडेक्स ऊपर जाता है तो फंड कितना कैप्चर करता है और जब इंडेक्स नीचे जाता है तो फंड कितना गिरता है। यहां भी टॉप 60% फंड्स को ही रखा गया जिससे 28 में से 17 फंड्स बचे।

एवरेज 3 ईयर रोलिंग रिटर्न

इसके बाद एवरेज 3 ईयर रोलिंग रिटर्न का नियम लगाया गया। इससे केवल वही फंड्स बचे जिनका ट्रैक रिकॉर्ड कम से कम 6 साल का था। इस स्टेप के बाद सिर्फ 8 फंड्स बचे।

शार्प्स रेशियो

अब शार्प्स रेशियो लगाया गया जो बताता है कि यूनिट रिस्क पर फंड कितना रिटर्न दे रहा है। यहां टॉप 75–80% फंड्स को रखा गया और आखिर में 6 म्यूचुअल फंड्स बचे।

टॉप मिड कैप फंड्स का विश्लेषण

इन 6 फंड्स में सबसे ऊपर HDFC Midcap Fund आया। इसका अप कैप्चर टू डाउन कैप्चर रेशियो लगभग 1.05 है यानी यह ऊपर जाते समय ज्यादा कैप्चर करता है और नीचे जाते समय कम गिरता है। इसका एवरेज 3 ईयर रोलिंग रिटर्न 21.41% है और शार्प्स रेशियो 1.34 है। 3 साल का रिटर्न करीब 26% और 5 साल का रिटर्न करीब 25% रहा है।

इसके अलावा Edelweiss Midcap Fund, HSBC Midcap Fund, Invesco Midcap Fund, Tata Midcap Fund और Mahindra Manulife Midcap Fund भी इसी प्रोसेस में टॉप पर आए।

कुछ फंड्स जैसे Motilal Oswal Midcap इस लिस्ट से बाहर इसलिए हुए क्योंकि पिछले एक साल का परफॉर्मेंस कमजोर रहा जिससे उनका शार्प्स रेशियो गिर गया।

फैक्टर मॉडल क्या होता है और इसका रोल

अब फैक्टर मॉडल की बात आती है। फैक्टर मॉडल का मतलब है कि आप अलग-अलग फैक्टर्स को अलग-अलग वेटेज देते हैं। अगर आप ज्यादा रिस्क ले सकते हैं तो रिटर्न को ज्यादा वेटेज देंगे और रिस्क को कम। अगर आप कंजर्वेटिव हैं तो रिस्क को ज्यादा वेटेज देंगे।

इस फैक्टर मॉडल में अप कैप्चर टू डाउन कैप्चर रेशियो, बीट बेंचमार्क परसेंटेज, एवरेज 3 ईयर रोलिंग रिटर्न 3 ईयर वोलैटिलिटी और शार्प्स रेशियो जैसे फैक्टर्स इस्तेमाल किए गए। इन्हीं के आधार पर फंड्स की रैंकिंग तय होती है।

बैक टेस्टिंग: दो मिड कैप फंड्स का उदाहरण

अब बैक टेस्टिंग के जरिए देखा गया कि अगर दो मिड कैप फंड्स में बराबर-बराबर निवेश किया जाता तो क्या रिजल्ट आता। यहां HDFC Midcap Fund और Mahindra Manulife Midcap Fund को चुना गया।

अगर जनवरी 2023 में 1 लाख रुपये निवेश किए जाते तो 3 साल बाद यह पोर्टफोलियो करीब 1.32 लाख रुपये का होता जबकि बेंचमार्क करीब 1.17 लाख रुपये का होता। यानी बेंचमार्क को लगभग 2% का अल्फा देकर बीट किया गया। वोलैटिलिटी और ड्रॉडाउन के मामले में भी यह पोर्टफोलियो बेंचमार्क से बेहतर रहा और शार्प्स रेशियो भी ज्यादा रहा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न [FAQs]

1. मिडकैप फंड्स में निवेश करने का सबसे सुरक्षित तरीका क्या है?

सबसे सुरक्षित तरीका सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान SIP है इसके माध्यम से आप हर महीने एक निश्चित राशि का निवेश करते हैं, जिससे आपको बाज़ार गिरने और चढ़ने के दौरान औसत मूल्य Rupee Cost Averaging का लाभ मिलता है।

2. क्या मुझे अपने निवेश का पूरा पैसा मिडकैप फंड्स में लगाना चाहिए?

बिल्कुल नहीं। जोखिम को संतुलित करने के लिए आपको अपना पैसा लार्ज कैप Large Cap मिडकैप Midcap और स्मॉल कैप Small Cap फंड्स के बीच बांटकर निवेश करना चाहिए।

3. क्या मिडकैप फंड्स में कम समय (1-2 साल) के लिए पैसा लगाना सही है?

नहीं मिडकैप फंड्स बाज़ार की अस्थिरता Volatility के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। सुरक्षित और स्थिर प्रतिफल Return के लिए निवेश की अवधि कम से कम 5 वर्ष होनी चाहिए।

4. मैं इन 5 फंड्स में से अपने लिए सही फंड कैसे चुनूँ?

सही फंड चुनने के लिए फंड का पिछला प्रदर्शन, उसका व्यय अनुपात Expense Ratio फंड को संभालने वाले मैनेजर का अनुभव और आपकी अपनी जोखिम सहने की क्षमता का आकलन करें।

5. क्या इन फंड्स से मिलने वाले मुनाफे पर टैक्स Tax लगता है?

जी हाँ। शेयर बाज़ार के नियमों के अनुसार, यदि आप निवेश करने के एक साल से पहले पैसा निकालते हैं तो आपको शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन STCG टैक्स देना होता है। एक साल के बाद पैसा निकालने पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन LTCG टैक्स के नियम लागू होते हैं।

निष्कर्ष

इस पूरे प्रोसेस में यह साफ हो जाता है कि Top 5 Midcap Funds in 2026 को चुनने के लिए सिर्फ नाम देखना काफी नहीं होता। पहले मिड कैप कैटेगरी को समझना जरूरी है फिर उसके ऐतिहासिक परफॉर्मेंस वैल्यूएशन स्क्रीनर और फैक्टर मॉडल के जरिए फंड्स को फिल्टर करना जरूरी है। इसके बाद बैक टेस्टिंग से यह देखा जाता है कि क्या वाकई ये फंड्स बेंचमार्क को बीट कर पाए हैं या नहीं। इसी स्टेप-बाय-स्टेप तरीके से मिड कैप फंड्स को फाइनल किया जाता है ताकि भविष्य में किसी तरह की गलती न हो।

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