मैं खुद ऐसी सिचुएशन से गुजर चुका हूं जहां घर के बाहर ब्लैक कलर की चमचमाती Mercedes खड़ी है। कुछ ही महीनों पहले ली हुई 60 लाख की Mercedes पार्किंग में खड़ी है। लेकिन घर की हालत ये है कि अगले महीने का घर का खर्चा कैसे चलेगा यह पता नहीं। ऐसी सिचुएशन मैंने अपनी आंखों से देखी है। इसलिए मुझे समझ आता है कि बुरा समय बिना बुलाए आता है। मुसीबतें कभी बता कर नहीं आतीं। अगले महीने क्या होने वाला है यह कोई नहीं जानता। ऐसे समय स्टॉक मार्केट और प्रॉपर्टी जैसी चीजें साथ नहीं देतीं। यही वजह है कि FD Investment का सही तरीका समझना बहुत जरूरी हो जाता है।
जब बुरा समय आता है तब क्या काम नहीं आता
जब अचानक जरूरत पड़ती है तब प्रॉपर्टी तुरंत बिकती नहीं। तीन महीने या छह महीने लग सकते हैं। तब तक पैसों की जरूरत बनी रहती है। स्टॉक मार्केट में अगर उस वक्त गिरावट है तो म्यूचुअल फंड और पोर्टफोलियो डाउन हो सकता है। उस सिचुएशन में क्या करेंगे। ऐसे समय दुनिया का एक ही ऐसा इन्वेस्टमेंट है जो साथ देता है। उससे सेफ इन्वेस्टमेंट का कोई रिप्लेसमेंट पूरी दुनिया में नहीं है। वह इन्वेस्टमेंट है फिक्स्ड डिपॉजिट।
FD Investment क्या होता है
एफडी का मतलब होता है फिक्स्ड डिपॉजिट। आपके पास ₹1 लाख हो ₹50,000 हो ₹10,000 हो या ₹5,000 हो। आपने बैंक में डिपॉजिट किया और उसी समय आपको बता दिया गया कि रिटर्न रेट कितना मिलेगा। 7% 8% या 9%। एक बार जो रेट कमिट हो गया वह किसी भी सिचुएशन में नहीं बदलता। चाहे इकॉनमी खराब हो जाए या कुछ भी हो जाए। अगर 9.2% कमिट किया गया है तो वही मिलेगा। यह गारंटी स्टॉक मार्केट जैसे रिस्की इन्वेस्टमेंट में कभी नहीं मिल सकती।
FD Investment का सबसे बड़ा फायदा
एफडी में आपको पहले से पता होता है कि कितने समय बाद कितना पैसा मिलेगा। अगर आपने 5 साल के लिए एफडी की है तो 5 साल बाद एग्जैक्ट अमाउंट पता होता है। ₹1 भी कम ज्यादा नहीं होता। यही वजह है कि हिंदुस्तानियों का भरोसा एफडी पर शुरुआत से रहा है। हमें ज्यादा रिटर्न से ज्यादा इस बात की चिंता रहती है कि पैसा सेफ रहे। बढ़े ना बढ़े लेकिन घटे नहीं।
FD Investment कब करनी चाहिए
अक्सर लोग सोचते हैं कि जब पैसा हो तभी इन्वेस्ट करना चाहिए। लेकिन असल बात यह है कि जब इन्वेस्टमेंट का सही मौका हो तब इन्वेस्ट करना चाहिए। जब तक सही मौका नहीं बनता तब तक पैसे को सुरक्षित रखना चाहिए। मान लो आप स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करना चाहते हैं लेकिन मार्केट पहले से बहुत ऊपर है। आप गिरावट का इंतजार करेंगे। गिरावट तीन महीने में आए या छह महीने में या एक साल में कोई नहीं जानता। तब तक उस पैसे को कहां रखें। सेविंग अकाउंट में रखने पर 3% मिलता है जबकि इनफ्लेशन 6% या 7% है। पैसा धीरे धीरे घटता है। ऐसे में एफडी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
शॉर्ट टर्म जरूरत में FD Investment क्यों जरूरी है
अगर आपको दो साल बाद जमीन खरीदनी है और पैसे अभी पास में हैं तो आप स्टॉक मार्केट में नहीं रख सकते। तीन महीने बाद जरूरत पड़ी और मार्केट गिरा हुआ मिला तो नुकसान होगा। ऐसी सिचुएशन में एफडी ही एकमात्र तरीका है जहां पैसा सेफ भी रहता है और जरूरत पड़ने पर मिल भी जाता है।
FD Investment के प्रकार
अब एफडी के टाइप समझते हैं।
इंटरेस्ट क्रेडिट एफडी क्या होती है
मान लो आपने ₹1 लाख की एफडी की और 9% रिटर्न है। एक साल बाद ₹9,000 इंटरेस्ट बनता है। यह ₹9,000 सीधे आपके सेविंग अकाउंट में आ जाता है और ₹1 लाख एफडी में ही रहता है। अगले साल फिर ₹9,000 बैंक में आ जाता है। इसे सिंपल इंटरेस्ट कहते हैं। यह सबसे खराब तरीका है। ऐसी एफडी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इंटरेस्ट को कंपाउंड होने का मौका ही नहीं मिलता।
कंपाउंडिंग एफडी क्या होती है
जब ₹9,000 का इंटरेस्ट वापस एफडी में ही जुड़ जाता है तो अगले साल पूरा अमाउंट पर इंटरेस्ट मिलता है। यही कंपाउंडिंग है। लंबे समय में यही तरीका बड़ा पैसा बनाता है। बिना कंपाउंडिंग के कभी बड़ा पैसा नहीं बन सकता। इसलिए सिंपल इंटरेस्ट वाली एफडी On करनी चाहिए।
क्वार्टरली और एनुअली कंपाउंडिंग
कंपाउंडिंग भी दो तरीके से होती है। क्वार्टरली और एनुअली। क्वार्टरली मतलब हर तीन महीने में इंटरेस्ट कंपाउंड होता है। एनुअली मतलब साल में एक बार। क्वार्टरली कंपाउंडिंग बेहतर होती है। लेकिन शॉर्ट टर्म एफडी में रिटर्न कम मिलता है। इसलिए एफडी करते वक्त ऑप्शन देखना जरूरी है कि क्वार्टरली चाहिए या एनुअली।
लॉन्ग टर्म FD Investment और टैक्स सेविंग
एक साल से ज्यादा की एफडी लॉन्ग टर्म एफडी होती है। अगर यह 5 साल की एफडी हो जाती है तो यह टैक्स सेविंग एफडी बन जाती है। इस पर सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक टैक्स रिबेट मिलता है। आमतौर पर एफडी पर टैक्स रिबेट नहीं मिलता लेकिन 5 साल की एफडी में यह सुविधा मिलती है।
FD Investment से रिटर्न कैसे बढ़ाएं FD Laddering
अब बात करते हैं एफडी लैडरिंग की।
FD Ladder क्या होता है
मान लो आपको ₹5 लाख की एफडी करनी है। एक ही एफडी बनाने की जगह आप ₹1 लाख की पांच एफडी बनाओ।
एक एफडी 5 साल के लिए
दूसरी 4 साल के लिए
तीसरी 3 साल के लिए
चौथी 2 साल के लिए
पांचवीं 1 साल के लिए
हर साल कोई न कोई एफडी मैच्योर होगी। जो मैच्योर होगी उसे आप दोबारा रीइन्वेस्ट कर दोगे। कुछ साल बाद कुल रिटर्न ज्यादा बनता है। यही एफडी लैडरिंग है। रकम ₹1 लाख हो या ₹5 लाख आप उसे पार्ट्स में बांट सकते हो।
FD Investment कहां करें बड़ा बैंक या छोटा बैंक
अक्सर लोग उसी बैंक में एफडी करते हैं जहां उनका अकाउंट होता है। बड़े बैंक जैसे SBI HDFC ICICI में। छोटे या स्मॉल फाइनेंस बैंक में लोग डर की वजह से नहीं जाते। लेकिन एक जरूरी बात यह है कि हर बैंक में ₹5 लाख तक की राशि RBI द्वारा इंश्यर्ड होती है। अगर बैंक के साथ कुछ भी होता है तो ₹5 लाख तक का पैसा सुरक्षित रहता है।
₹5 लाख से ज्यादा FD Investment कैसे करें
अगर आपको ₹10 लाख की एफडी करनी है तो एक ही अकाउंट में मत रखो। ₹5 लाख अपने नाम से और ₹5 लाख किसी और फैमिली मेंबर के नाम से कर दो। हर यूजर पर ₹5 लाख इंश्यर्ड होता है।
निष्कर्ष
FD Investment इसलिए जरूरी है क्योंकि बुरा समय बिना बताए आता है। जब तक सही इन्वेस्टमेंट का मौका न बने तब तक पैसे को सुरक्षित रखना जरूरी है। एफडी ऐसा ही एकमात्र इंस्ट्रूमेंट है जो सेफ्टी के साथ निश्चित रिटर्न देता है। सही टाइप की एफडी चुनकर और सही तरीके से करने पर एफडी आपके बुरे समय में सबसे बड़ा सहारा बनती है।








