गांव की बाकी दीदियों के फोन पर बैंक का मैसेज आ गया, पासबुक में एंट्री भी चढ़ गई, लेकिन आपके खाते में एक रुपया नहीं दिखा. ऐसी हालत में सबसे पहले मन में यही आता है कि कहीं नाम तो नहीं कट गया. अगर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का पैसा नहीं आया है, तो घबराने से पहले यह समझ लीजिए कि ज्यादातर मामलों में वजह बैंक खाते या कागज की छोटी सी गड़बड़ी होती है, जिसे ठीक किया जा सकता है.
यह सवाल लाखों परिवारों का है. पहली किस्त के 10,000 रुपये 1.67 करोड़ से ज्यादा महिलाओं तक पहुंच चुके हैं, पर हर बैच में कुछ खाते ऐसे रह जाते हैं जिनमें पैसा नहीं पहुंचता. दूसरी किस्त के 20,000 रुपये तो अभी गिनी-चुनी महिलाओं को ही मिले हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आपका मामला किस तरह का है.
नीचे आपको पैसा न आने के असली कारण, घर बैठे जांच के आधिकारिक तरीके, बैंक में क्या कहना है, किससे और कैसे शिकायत करनी है, और किन धोखेबाजों से बचना है, यह सब क्रम से मिलेगा. यह जानकारी 24 अक्टूबर 2026 तक की आधिकारिक वेबसाइटों और खबरों पर आधारित है.
पहले समझिए: पैसा किस रास्ते से आपके खाते तक आता है
योजना की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक राशि आधार आधारित डीबीटी से भेजी जाती है. जीविका मुख्यालय से पैसा उस बैंक खाते में जाता है जो लाभार्थी के आधार से जुड़ा है. यानी आवेदन में आपने जो खाता लिखा था, जरूरी नहीं कि पैसा उसी में आए. पैसा उस खाते में जाता है जो आधार के जरिए एनपीसीआई मैपर पर डीबीटी के लिए दर्ज है.
यूआईडीएआई साफ कहता है कि डीबीटी का लाभ सिर्फ एक खाते में मिलता है, और वह खाता वही होता है जिसे आपने बैंक में आधार जोड़ते समय सहमति फॉर्म में चुना था. बिहार के गांवों में बहुत सी महिलाओं के दो खाते होते हैं, एक पुराना जनधन खाता और एक जीविका समूह के समय खुला खाता. पैसा किसी दूसरे खाते में चला गया हो, तो आपको लगेगा कि आया ही नहीं.
| चरण | क्या होता है | कहां अटक सकता है |
|---|---|---|
| 1. आवेदन | ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम संगठन के जरिए, शहरी क्षेत्र में ऑनलाइन या समूह के जरिए | फॉर्म जमा ही न हुआ हो |
| 2. सत्यापन | पात्रता और बिहार निवासी होने की भौतिक जांच | शर्त पूरी न होना, जांच बाकी रहना |
| 3. भुगतान सूची | सत्यापित नाम बैच में भुगतान के लिए भेजे जाते हैं | आपका बैच अभी न आया हो |
| 4. डीबीटी | आधार से जुड़े खाते में राशि भेजी जाती है | आधार सीडिंग, केवाईसी, बंद खाता |
महिला रोजगार योजना का पैसा नहीं आया, ये हैं 7 मुख्य कारण

हर कारण का इलाज अलग है, इसलिए पहले यह पहचानिए कि आपके साथ कौन सी बात लागू होती है. नीचे दिए कारण उसी क्रम में हैं जिसमें गांव-शहर में सबसे ज्यादा शिकायतें आती हैं.
1. आधार बैंक खाते से जुड़ा नहीं है या डीबीटी के लिए चालू नहीं
सबसे बड़ी वजह यही है. सिर्फ खाता खुलवा लेना काफी नहीं है. बैंक को आपके आधार को खाते से जोड़कर एनपीसीआई मैपर पर दर्ज करना होता है, तभी खाता डीबीटी के लिए तैयार माना जाता है. कई पुराने खातों में आधार नंबर तो लिखा होता है, पर डीबीटी की सहमति नहीं दी गई होती.
2. आधार किसी दूसरे खाते से जुड़ा है
अगर आपने हाल में किसी नए बैंक में आधार जोड़ा है, तो डीबीटी उसी नए खाते में जा सकता है. ऐसे में आप पुराने खाते की पासबुक देखती रहेंगी और पैसा दूसरे खाते में पड़ा रहेगा. यह जांचना सबसे आसान है और इसका तरीका आगे बताया गया है.
3. खाता बंद, निष्क्रिय या केवाईसी अधूरी
जिस खाते में लंबे समय तक कोई लेनदेन न हुआ हो, बैंक उसे निष्क्रिय कर सकता है. केवाईसी पुरानी होने पर भी खाते में पैसा आने में दिक्कत आती है. जनधन जैसे छोटे खातों में तय सीमा से ज्यादा रकम एक साथ आने पर भी बैंक केवाईसी पूरी करने को कहता है.
4. नाम की स्पेलिंग आधार और बैंक में अलग
आधार में “सुनीता देवी” और बैंक में “सुनिता कुमारी” लिखा हो, तो भुगतान अटक सकता है. शादी के बाद नाम या पति का नाम बदलने वाली महिलाओं में यह दिक्कत आम है.
5. पात्रता की शर्त पूरी नहीं हुई
खबरों में बताए गए नियमों के अनुसार आवेदिका की उम्र 18 से 60 साल होनी चाहिए. आवेदिका या उसके पति आयकर दाता नहीं होने चाहिए, और दोनों में से कोई भी नियमित या संविदा सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए. परिवार की परिभाषा में पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे आते हैं, और एक परिवार से एक ही महिला को लाभ मिलता है. अगर घर में पहले से किसी दूसरी महिला को पैसा मिल चुका है, तो आपका नाम सत्यापन में रुक सकता है.
6. समूह की सदस्यता या आवेदन ही पूरा नहीं हुआ
ग्रामीण क्षेत्र में जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य होना जरूरी है. शहरी क्षेत्र में भी ऑनलाइन आवेदन के बाद समूह से जुड़ना पड़ता है, उसके बाद ही लाभ मिलता है. कई शहरी महिलाओं ने ऑनलाइन फॉर्म तो भर दिया, पर समूह से जुड़ने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई.
7. आपका बैच अभी आया ही नहीं
भुगतान एक दिन में सबको नहीं जाता. सितंबर 2025 से अब तक पैसा कई चरणों में भेजा गया है. दूसरी किस्त के मामले में यह और भी साफ है, क्योंकि 20,000 रुपये सिर्फ उन्हीं महिलाओं को जा रहे हैं जिनका रोजगार सत्यापन पूरा हो चुका है. अगस्त 2026 में दूसरी किस्त 1 लाख महिलाओं को भेजे जाने की खबर आई थी.
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घर बैठे कैसे जांचें कि पैसा आया या नहीं
बैंक या ब्लॉक का चक्कर लगाने से पहले ये चार जांच मोबाइल और पासबुक से कर लीजिए. इससे आपको पता चल जाएगा कि दिक्कत खाते में है या सूची में.
- आधार सीडिंग स्टेटस देखिए: यूआईडीएआई के माई आधार पोर्टल पर लॉगिन करके बैंक सीडिंग स्टेटस खोलिए. आधार से जुड़े मोबाइल पर ओटीपी आएगा. यहां दिख जाएगा कि आपका आधार किस बैंक से डीबीटी के लिए जुड़ा है और वह चालू है या नहीं.
- उसी बैंक का खाता जांचिए: सीडिंग में जिस बैंक का नाम दिखे, उसी बैंक के खाते की पासबुक अपडेट कराइए या मिनी स्टेटमेंट निकालिए. कई बार पैसा वहीं मिल जाता है.
- बैंक के एसएमएस और यूपीआई ऐप देखिए: खाते से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए संदेश देखिए. यूपीआई चालू है तो फोनपे, गूगल पे या भीम में लेनदेन की सूची देखिए.
- बैंक मित्र से स्टेटमेंट लीजिए: गांव के सीएसपी पर आधार और अंगूठे से बैलेंस और मिनी स्टेटमेंट निकलवाइए. इसमें खाते की पिछली एंट्री दिख जाती है.
अगर सीडिंग स्टेटस में आपका आधार किसी बैंक से जुड़ा ही नहीं दिखता, तो वजह साफ है. ऐसी हालत में सीधे बैंक जाइए. अगर सीडिंग ठीक है और फिर भी पैसा नहीं आया, तो मामला सूची या सत्यापन का है, और उसके लिए जीविका से बात करनी होगी.
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बैंक शाखा में जाकर क्या करें
बैंक जाते समय आधार कार्ड, पासबुक और वह मोबाइल साथ रखिए जो खाते से जुड़ा है. काउंटर पर साफ शब्दों में कहिए कि आपको अपने खाते में “आधार सीडिंग और डीबीटी के लिए एनपीसीआई मैपिंग” करानी है. यूआईडीएआई के अनुसार इसके लिए बैंक एक सहमति फॉर्म भरवाता है.
| समस्या | बैंक में क्या कहें | साथ ले जाएं |
|---|---|---|
| आधार खाते से नहीं जुड़ा | आधार सीडिंग और डीबीटी सहमति फॉर्म | आधार कार्ड, पासबुक |
| पैसा दूसरे खाते में जा रहा | इसी खाते को डीबीटी के लिए चुनने का फॉर्म | आधार, पासबुक, मोबाइल |
| खाता निष्क्रिय | खाता दोबारा चालू कराना | आधार, पासबुक, फोटो |
| केवाईसी अधूरी | केवाईसी अपडेट | आधार, पैन हो तो पैन, फोटो |
| नाम में अंतर | बैंक रिकॉर्ड में नाम सुधार | आधार और नाम का प्रमाण |
मान लीजिए भागलपुर के किसी गांव की रीना जी का एक खाता सहकारी बैंक में और दूसरा जनधन खाता सरकारी बैंक में है. सीडिंग स्टेटस में सहकारी बैंक का नाम दिखा, पर वह खाता दो साल से बंद पड़ा था. ऐसे मामले में उन्हें या तो पुराना खाता चालू कराना होगा, या जनधन खाते वाले बैंक में जाकर उसे डीबीटी के लिए चुनना होगा. बदलाव के बाद नए भुगतान उसी चालू खाते में आएंगे.
सीडिंग पूरी होने में कुछ दिन लग सकते हैं, इसलिए बैंक से पावती लीजिए और बाद में माई आधार पर स्टेटस दोबारा देखिए.
खाता ठीक है फिर भी पैसा नहीं आया, तो किससे पूछें
जब बैंक की तरफ से सब ठीक हो, तो सवाल यह है कि आपका नाम भुगतान सूची में गया या नहीं. इसका जवाब बैंक नहीं, योजना चलाने वाली संस्था देगी.
- ग्रामीण महिलाएं: सबसे पहले अपने समूह की अध्यक्ष या सचिव, फिर ग्राम संगठन और सामुदायिक कैडर से पूछिए कि आपका नाम सत्यापित हुआ या नहीं. वहां से जवाब न मिले तो प्रखंड स्तर के जीविका कार्यालय यानी बीपीआईयू में जाइए.
- शहरी महिलाएं: अपने वार्ड के स्वयं सहायता समूह, सामुदायिक संसाधन व्यक्ति या नगर निकाय कार्यालय से आवेदन की स्थिति पूछिए.
- दूसरी किस्त वाली महिलाएं: पूछिए कि आपके रोजगार का सत्यापन हुआ या नहीं, और पहली किस्त के उपयोग का ब्योरा जमा हुआ या नहीं.
बात करते समय अपना आधार नंबर, समूह का नाम, ग्राम संगठन का नाम और खाते की जानकारी एक पर्ची पर लिखकर ले जाइए. इससे कर्मचारी तुरंत आपका रिकॉर्ड खोज पाएंगे और बार-बार चक्कर नहीं लगेगा.
महिला रोजगार योजना का पैसा नहीं आया तो शिकायत कैसे करें
अगर जीविका या नगर निकाय के स्तर पर लंबे समय तक सुनवाई न हो, तो बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत लिखित शिकायत कर सकती हैं. राज्य सरकार की वेबसाइट के अनुसार इस कानून में सुनवाई और निपटारे की अधिकतम सीमा 60 कार्य दिवस है, और शिकायत करने के लिए किसी योग्यता की जरूरत नहीं है.
- बिहार लोक शिकायत निवारण पोर्टल खोलिए. यहां चौबीसों घंटे ऑनलाइन शिकायत दर्ज होती है, और मोबाइल ऐप से भी शिकायत की जा सकती है.
- अपना नाम, मोबाइल नंबर और पता भरिए.
- शिकायत में साफ लिखिए कि आप किस जिले, प्रखंड और ग्राम संगठन से हैं, आवेदन कब किया, किस्त कौन सी नहीं मिली, और बैंक में सीडिंग ठीक है या नहीं.
- पासबुक का पहला पन्ना और सीडिंग स्टेटस का स्क्रीनशॉट जोड़ दें तो मामला मजबूत होता है.
- शिकायत संख्या संभालकर रखिए. उसी से आप सुनवाई की तारीख और स्थिति देख पाएंगी.
ऑनलाइन नहीं कर पा रहीं, तो अपने अनुमंडल या जिले के लोक शिकायत निवारण कार्यालय में जाकर भी आवेदन दे सकती हैं. फैसले से संतुष्ट न हों तो इसी कानून में अपील के दो स्तर और उसके बाद पुनरीक्षण की व्यवस्था है.
इन गलतियों और धोखेबाजों से बचें
पैसा अटकने पर लोग जल्दी समाधान के चक्कर में ठगों के हाथ लग जाते हैं. पटना, गया या मुजफ्फरपुर, हर जगह ऐसे फोन और एजेंट की शिकायतें आती रहती हैं.
- कोई फोन करके कहे कि “आपकी किस्त रुकी है, ओटीपी बताइए”, तो फोन काट दीजिए. सरकारी किस्त के लिए ओटीपी, एटीएम पिन या यूपीआई पिन कोई नहीं मांगता.
- किस्त दिलाने के नाम पर कमीशन या “फाइल चार्ज” मत दीजिए. योजना में आवेदन या भुगतान के लिए कोई फीस नहीं बताई गई है.
- व्हाट्सऐप पर आए अनजान लिंक या ऐप फाइल मत खोलिए. स्टेटस और सीडिंग सिर्फ आधिकारिक पोर्टल या बैंक से देखिए.
- बार-बार नया खाता मत खुलवाइए. हर नए खाते में आधार जोड़ने से डीबीटी का रास्ता बदल सकता है और उलझन बढ़ती है.
- दोबारा आवेदन करने से पहले समूह से पूछ लीजिए. एक परिवार से एक ही महिला पात्र है, दो आवेदन से मामला और अटक सकता है.
दूसरी किस्त के 20,000 रुपये नहीं आए तो अलग से क्या देखें
दूसरी किस्त का नियम पहली किस्त से अलग है. आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त मदद रोजगार शुरू होने के 6 महीने बाद आकलन के आधार पर दी जाती है. इसका मतलब है कि सिर्फ खाता ठीक होना काफी नहीं, आपका काम भी चालू दिखना चाहिए.
- पहली किस्त से जो काम शुरू किया, वह अभी चल रहा है या नहीं.
- रोजगार का ब्योरा और पहली किस्त के उपयोग का प्रमाण समूह के जरिए जमा हुआ या नहीं.
- सत्यापन के लिए कर्मचारी आए थे या नहीं, और उन्होंने क्या देखा.
- सामान की रसीद, बिक्री की कॉपी और काम की फोटो आपके पास हैं या नहीं.
मान लीजिए गया के किसी गांव की पूजा जी ने पहली किस्त से सिलाई मशीन ली और रोज कपड़े सिलती हैं, पर उनका ब्योरा समूह की सूची में चढ़ा ही नहीं. ऐसे में उनकी दूसरी किस्त बैंक की वजह से नहीं, कागज की वजह से रुकी है. इसका हल ग्राम संगठन में ब्योरा दोबारा जमा कराना है, बैंक के चक्कर लगाना नहीं.
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
महिला रोजगार योजना का पैसा नहीं आया, सबसे पहले क्या करें?
सबसे पहले माई आधार पोर्टल पर बैंक सीडिंग स्टेटस देखिए. इससे पता चलेगा कि आपका आधार किस बैंक खाते से डीबीटी के लिए जुड़ा है. उसी खाते की पासबुक या मिनी स्टेटमेंट जांचिए. सीडिंग नहीं दिखे तो बैंक जाकर आधार सीडिंग कराइए.
मेरे दो बैंक खाते हैं, पैसा किसमें आएगा?
यूआईडीएआई के अनुसार डीबीटी का पैसा सिर्फ एक खाते में आता है, वह खाता जिसे आपने बैंक में आधार जोड़ते समय सहमति फॉर्म में चुना था. दूसरा खाता देखने पर पैसा न दिखे, तो पहले सीडिंग स्टेटस देखिए.
सीडिंग ठीक है फिर भी 10,000 रुपये नहीं आए, क्यों?
तब वजह भुगतान सूची या सत्यापन हो सकती है. हो सकता है आपका सत्यापन बाकी हो, पात्रता की कोई शर्त पूरी न हुई हो या आपका बैच अभी न आया हो. ग्रामीण महिलाएं ग्राम संगठन और प्रखंड जीविका कार्यालय से, शहरी महिलाएं नगर निकाय कार्यालय से पूछें.
पैसा न मिलने की शिकायत कहां करें?
पहले जीविका या नगर निकाय के स्तर पर पूछिए. सुनवाई न हो तो बिहार लोक शिकायत निवारण पोर्टल lokshikayat.bihar.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत कीजिए या लोक शिकायत निवारण कार्यालय में आवेदन दीजिए. कानून में निपटारे की अधिकतम सीमा 60 कार्य दिवस है.
क्या किस्त दिलाने के लिए किसी को पैसे देने होंगे?
नहीं. योजना में आवेदन या भुगतान के लिए कोई फीस नहीं बताई गई है. कोई कमीशन, ओटीपी या पिन मांगे, तो वह धोखाधड़ी है.
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का पैसा नहीं आया है, तो इसे क्रम से सुलझाइए. पहले माई आधार पर सीडिंग स्टेटस देखिए, फिर उसी बैंक खाते की जांच कीजिए. सीडिंग या केवाईसी में गड़बड़ी हो तो बैंक में ठीक कराइए. खाता सही हो तो ग्राम संगठन, जीविका कार्यालय या नगर निकाय से अपने सत्यापन की स्थिति पूछिए. फिर भी बात न बने तो लोक शिकायत पोर्टल पर लिखित शिकायत कीजिए.
आधिकारिक जानकारी के लिए योजना की आधिकारिक वेबसाइट देखिए, और आधार से जुड़े खाते के नियम यूआईडीएआई की डीबीटी जानकारी पर पढ़िए. सीडिंग स्टेटस यूआईडीएआई के माई आधार पोर्टल पर देखा जा सकता है.
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी और जागरूकता के लिए है. योजना के नियम, किस्त की रकम और प्रक्रिया सरकार बदल सकती है, और कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है. कोई भी कदम उठाने से पहले योजना की आधिकारिक वेबसाइट, जीविका कार्यालय या अपने बैंक से पुष्टि जरूर कर लें.









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