आवेदन जमा किए कई हफ्ते हो गए, पड़ोस की दीदी के खाते में पैसा भी आ गया, लेकिन आपको यह तक नहीं पता कि फॉर्म आगे बढ़ा या वहीं अटका है. यही वजह है कि बिहार में सबसे ज्यादा खोजा जाने वाला सवाल है Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana status check kaise kare. इसका सीधा जवाब यह है कि स्टेटस एक जगह नहीं, तीन जगह देखना पड़ता है: आवेदन, सत्यापन और बैंक भुगतान.
बहुत सी महिलाएं इंटरनेट पर “स्टेटस चेक” लिखकर ऐसी वेबसाइटों पर पहुंच जाती हैं जो सरकारी नहीं हैं. कुछ वहां आधार नंबर और मोबाइल डाल देती हैं, और कुछ ठगों के फोन का शिकार बन जाती हैं. इसलिए पहले यह समझना जरूरी है कि आधिकारिक तौर पर क्या जांचा जा सकता है और कहां से.
नीचे आपको शहरी और ग्रामीण, दोनों तरह की आवेदिकाओं के लिए अलग-अलग तरीका, आधार सीडिंग से भुगतान का रास्ता देखने के कदम, बैंक में पैसा जांचने के चार तरीके और दूसरी किस्त की स्थिति समझने का तरीका मिलेगा. जानकारी 26 अक्टूबर 2026 तक की आधिकारिक वेबसाइटों पर आधारित है.
Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana status check kaise kare: पहले यह जान लीजिए
योजना की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इस योजना में हर परिवार की एक महिला को अपनी पसंद का रोजगार शुरू करने के लिए पहली किस्त में 10,000 रुपये दिए जाते हैं. रोजगार शुरू होने के 6 महीने बाद आकलन के आधार पर 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त मदद का प्रावधान है. ग्रामीण क्षेत्र में योजना जीविका चलाती है और शहरी क्षेत्र में नगर विकास एवं आवास विभाग के साथ इसे लागू किया जाता है.
पैसा जीविका मुख्यालय से आधार आधारित डीबीटी के जरिए सीधे लाभार्थी के आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजा जाता है. अभी योजना की वेबसाइट पर ऐसा कोई अलग बटन नहीं दिखता, जिसमें आवेदन संख्या डालकर पूरा स्टेटस एक साथ दिख जाए. शहरी आवेदन वाले पोर्टल पर भी सिर्फ नया पंजीकरण खोलने के लिंक हैं. इसलिए जो वेबसाइट “एक क्लिक में लाभार्थी स्टेटस” का दावा करे, उस पर आधार नंबर डालने से पहले दो बार सोचिए.
मुजफ्फरपुर या दरभंगा की कोई दीदी अगर यह जानना चाहती है कि उसका पैसा कहां अटका है, तो उसे सही सवाल सही जगह पूछना होगा. फॉर्म की स्थिति समूह या एएलओ बताएगा, पैसा किस खाते में जाएगा यह आधार सीडिंग बताएगी, और पैसा आया या नहीं, यह बैंक बताएगा.
स्टेटस के तीन हिस्से: आवेदन, सत्यापन और भुगतान
नीचे की तालिका से समझिए कि किस बात की जानकारी कहां से मिलेगी. इसे एक बार ध्यान से देख लेंगी, तो बार-बार गलत दफ्तर के चक्कर नहीं लगेंगे.
| क्या जानना है | कहां से पता चलेगा | क्या साथ रखें |
|---|---|---|
| आवेदन जमा हुआ या नहीं | शहरी: आवेदन संख्या और मोबाइल पर आया संदेश. ग्रामीण: समूह और ग्राम संगठन का रिकॉर्ड | आधार नंबर, आवेदन संख्या |
| सत्यापन पूरा हुआ या नहीं | ग्रामीण: ग्राम संगठन, सामुदायिक कैडर, प्रखंड जीविका कार्यालय. शहरी: एएलओ, सीआरपी, नगर निकाय | समूह का नाम, वार्ड या गांव का नाम |
| पैसा किस खाते में जाएगा | माई आधार पोर्टल पर बैंक सीडिंग स्टेटस | आधार से जुड़ा मोबाइल |
| पैसा आया या नहीं | बैंक एसएमएस, पासबुक, मिनी स्टेटमेंट, बैंक मित्र | पासबुक, आधार, एटीएम कार्ड हो तो |
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शहरी महिलाएं आवेदन का स्टेटस कैसे जानें

शहरी क्षेत्र में आवेदन मोबाइल या कंप्यूटर से ऑनलाइन होता है. आवेदन में आधार नंबर, आधार में लिखा नाम, पिता या पति का नाम, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और बैंक खाते का ब्योरा भरना होता है. ओटीपी से पुष्टि के बाद फॉर्म जमा होता है और स्क्रीन पर आवेदन संख्या दिखती है. यही संख्या आपके स्टेटस की चाबी है.
- आवेदन संख्या ढूंढिए: फॉर्म भरते समय जो संख्या मिली थी, उसका स्क्रीनशॉट या लिखी हुई पर्ची निकालिए. आधार से जुड़े मोबाइल के संदेश भी देख लीजिए.
- समूह से जुड़ने की स्थिति पूछिए: शहरी आवेदन के बाद सामुदायिक संसाधन व्यक्ति यानी सीआरपी आवेदिका से संपर्क करके उसे स्वयं सहायता समूह से जोड़ते हैं. समूह से जुड़ने के बाद ही लाभ शुरू होता है.
- एएलओ या सीआरपी से संपर्क कीजिए: शहरी आवेदन पोर्टल पर ही लिखा है कि जो महिलाएं पहले से शहरी समूह की सदस्य हैं, वे फॉर्म न भरें और अपने क्षेत्र स्तरीय संगठन यानी एएलओ या सीआरपी से संपर्क करें. स्टेटस की जानकारी के लिए भी यही सबसे सही जगह है.
- नगर निकाय कार्यालय जाइए: पटना नगर निगम हो या भागलपुर, वार्ड के समूह से जवाब न मिले तो नगर निकाय में योजना देखने वाले कर्मचारी से आवेदन संख्या दिखाकर पूछिए.
एक बात ध्यान रखिए. स्टेटस न मिलने पर दोबारा ऑनलाइन फॉर्म भरने की गलती मत कीजिए. एक परिवार से एक ही महिला पात्र है और एक ही आधार से दो आवेदन होने पर मामला सुलझने के बजाय उलझ सकता है.
ग्रामीण महिलाएं जीविका समूह से स्टेटस कैसे पता करें

गांव में आवेदन ऑनलाइन नहीं, जीविका के ढांचे के जरिए होता है. जो महिलाएं जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं, उनका आवेदन ग्राम संगठन की विशेष बैठक में समूह के हिसाब से इकट्ठा भरा जाता है. जो सदस्य नहीं हैं, उन्हें पहले समूह से जुड़ने के लिए ग्राम संगठन में तय फॉर्म पर आवेदन देना होता है. इसलिए गांव की दीदी का स्टेटस भी इसी रास्ते से पता चलता है.
- अपने समूह की अध्यक्ष, सचिव या कोषाध्यक्ष से पूछिए कि आपका नाम ग्राम संगठन को भेजी गई सूची में है या नहीं.
- ग्राम संगठन की बैठक में या वहां के बुक कीपर और सामुदायिक कैडर से पूछिए कि आपका सत्यापन पूरा हुआ या नहीं.
- सत्यापन में कोई कमी बताई जाए, जैसे उम्र, बैंक खाता या परिवार में पहले से लाभ, तो उसी दिन लिखकर ले लीजिए कि क्या सुधार करना है.
- दो-तीन हफ्ते में जवाब न मिले तो प्रखंड स्तर के जीविका कार्यालय यानी बीपीआईयू में आधार नंबर और समूह का नाम लेकर जाइए.
मान लीजिए गया जिले के किसी गांव की सविता जी ने ग्राम संगठन के जरिए आवेदन किया. समूह की सचिव बताती हैं कि नाम सूची में गया है, पर भुगतान नहीं आया. अब सविता जी को जीविका कार्यालय की दौड़ लगाने से पहले अगला कदम उठाना चाहिए, यानी आधार सीडिंग जांचनी चाहिए. ज्यादातर मामलों में अटकाव यहीं निकलता है.
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Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana status check kaise kare: आधार सीडिंग से पेमेंट का रास्ता देखें

चूंकि पैसा आधार आधारित डीबीटी से आता है, इसलिए यह जानना सबसे जरूरी है कि आपका आधार किस बैंक खाते से डीबीटी के लिए जुड़ा है. यूआईडीएआई की डीबीटी जानकारी के अनुसार बैंक सीडिंग स्टेटस माई आधार पोर्टल पर देखा जा सकता है, और वहां की जानकारी एनपीसीआई के सर्वर से आती है.
- मोबाइल या कंप्यूटर पर यूआईडीएआई का माई आधार पोर्टल खोलिए. पता ब्राउजर में खुद टाइप कीजिए, किसी विज्ञापन वाले लिंक से नहीं.
- आधार नंबर और कैप्चा भरकर ओटीपी मंगाइए. ओटीपी उसी मोबाइल पर आएगा जो आधार से जुड़ा है.
- लॉगिन के बाद बैंक सीडिंग स्टेटस वाला विकल्प खोलिए.
- यहां बैंक का नाम और सीडिंग की स्थिति दिखेगी. स्थिति चालू हो, तो योजना का पैसा इसी बैंक के खाते में आएगा.
- माई आधार पोर्टल न खुले, तो यूआईडीएआई ने एनपीसीआई की सीडिंग जानकारी वाले पेज का विकल्प भी बताया है. वहां भी आधार और ओटीपी से जानकारी मिलती है.
यूआईडीएआई के अनुसार डीबीटी का पैसा एक ही खाते में आता है, वह खाता जिसे आपने बैंक में आधार जोड़ते समय सहमति देकर चुना था. बिहार के गांवों में कई महिलाओं के पास एक जनधन खाता और एक समूह के समय खुला खाता होता है. सीडिंग में जिस बैंक का नाम दिखे, उसी की पासबुक देखिए.
| सीडिंग स्टेटस में क्या दिखा | मतलब | आपको क्या करना है |
|---|---|---|
| बैंक का नाम और स्थिति चालू | पैसा इसी बैंक के खाते में आएगा | इसी खाते का बैलेंस और स्टेटमेंट देखिए |
| दूसरे बैंक का नाम | पैसा उस खाते में जा रहा है जिसे आप नहीं देख रहीं | उस खाते को जांचिए या चाहें तो दूसरे बैंक में डीबीटी सहमति फॉर्म भरिए |
| कोई बैंक नहीं जुड़ा | डीबीटी का पैसा आ ही नहीं सकता | बैंक जाकर आधार सीडिंग और डीबीटी सहमति कराइए |
| स्थिति बंद या निष्क्रिय | खाते में पैसा पहुंचने में दिक्कत | बैंक में केवाईसी और खाता चालू कराइए |
बैंक खाते में पैसा आया या नहीं, ऐसे देखें
यूआईडीएआई बताता है कि डीबीटी का पैसा आने की जानकारी बैंक के एसएमएस अलर्ट से मिलती है, और बैलेंस आप एटीएम, माइक्रो एटीएम या बैंक मित्र, इंटरनेट या मोबाइल बैंकिंग और फोन बैंकिंग से देख सकती हैं. गांव और शहर, दोनों के लिए ये चार तरीके सबसे काम के हैं:
- एसएमएस: खाते से जुड़े मोबाइल पर आए क्रेडिट वाले संदेश देखिए. ध्यान रहे, संदेश बैंक के नाम से आता है, योजना के नाम से नहीं.
- पासबुक प्रिंट: शाखा या पासबुक प्रिंटिंग मशीन पर पासबुक अपडेट कराइए. डीबीटी की एंट्री में अक्सर भेजने वाली संस्था का छोटा नाम लिखा होता है.
- बैंक मित्र या सीएसपी: गांव के ग्राहक सेवा केंद्र पर आधार और अंगूठे से बैलेंस और मिनी स्टेटमेंट निकलवाइए. इसके लिए एटीएम कार्ड की जरूरत नहीं होती.
- यूपीआई या मोबाइल बैंकिंग: फोनपे, गूगल पे, भीम या बैंक के ऐप में खाते का बैलेंस और लेनदेन की सूची देखिए.
मान लीजिए पूर्णिया की रुबी जी के खाते में 10,000 रुपये आए, पर एसएमएस नहीं आया क्योंकि खाते में पति का पुराना नंबर जुड़ा था. पासबुक अपडेट कराते ही एंट्री दिख गई. इसलिए एसएमएस न आने को पैसा न आना मत समझिए, पहले पासबुक या मिनी स्टेटमेंट देखिए.
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दूसरी किस्त का स्टेटस कैसे समझें
दूसरी किस्त का नियम पहली से अलग है. आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार अतिरिक्त मदद रोजगार शुरू होने के 6 महीने बाद आकलन के आधार पर दी जाती है. यानी यहां स्टेटस का मतलब सिर्फ खाता सही होना नहीं, बल्कि यह भी है कि आपके काम का सत्यापन हुआ या नहीं.
- पहली किस्त से शुरू किया गया काम, जैसे किराना, सिलाई, बकरी पालन या सब्जी की दुकान, अभी चालू है या नहीं.
- पहली किस्त के उपयोग का ब्योरा समूह या ग्राम संगठन के जरिए जमा हुआ या नहीं.
- सत्यापन के लिए कर्मचारी आए थे या नहीं, और उन्होंने किस बात पर सवाल उठाया.
- सामान खरीदने की रसीद, बिक्री का हिसाब और काम की फोटो आपके पास संभालकर रखी है या नहीं.
इन चारों में से कोई बात अधूरी है, तो दूसरी किस्त का स्टेटस बैंक से नहीं, समूह और जीविका से ही आगे बढ़ेगा.
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स्टेटस देखने के नाम पर ठगी से बचें

जहां लाखों महिलाएं किसी किस्त का इंतजार कर रही हों, वहां ठग भी सक्रिय हो जाते हैं. पटना, सीवान, सहरसा, हर जिले से ऐसे फोन और व्हाट्सऐप संदेश की बातें सुनने को मिलती हैं जिनमें “स्टेटस अपडेट” के नाम पर जानकारी मांगी जाती है.
- कोई फोन करके कहे कि “आपका स्टेटस पेंडिंग है, ओटीपी बताइए तो पैसा भेज देंगे”, तो फोन काट दीजिए. ओटीपी सिर्फ आप खुद पोर्टल पर डालती हैं, किसी को बताती नहीं.
- व्हाट्सऐप पर आई एपीके फाइल या अनजान ऐप डाउनलोड मत कीजिए. ऐसी फाइल से मोबाइल के संदेश और बैंक की जानकारी चोरी हो सकती है.
- स्टेटस दिखाने या नाम सूची में डलवाने के बदले पैसे मांगने वाले से दूर रहिए. योजना में ऐसी कोई फीस नहीं बताई गई है.
- आधार नंबर सिर्फ आधिकारिक पोर्टल, बैंक या अपने समूह को दीजिए. गैर-सरकारी वेबसाइट पर आधार और मोबाइल डालने से बचिए.
अगर समूह, जीविका कार्यालय या नगर निकाय से लंबे समय तक जवाब न मिले, तो बिहार लोक शिकायत निवारण पोर्टल पर लिखित शिकायत कर सकती हैं. शिकायत में जिला, प्रखंड, समूह का नाम, आवेदन की तारीख और सीडिंग की स्थिति साफ लिखिए.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana status check kaise kare, क्या कोई सरकारी वेबसाइट है?
योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर अभी आवेदन संख्या डालकर स्टेटस देखने का अलग विकल्प नहीं दिखता. इसलिए स्टेटस तीन तरह से जांचिए: आवेदन और सत्यापन की जानकारी समूह, ग्राम संगठन या एएलओ से, आधार सीडिंग की जानकारी माई आधार पोर्टल से, और पैसा आया या नहीं, यह बैंक खाते से.
आधार नंबर से महिला रोजगार योजना का पैसा कैसे देखें?
आधार नंबर से सीधे योजना का भुगतान नहीं दिखता, पर यह पता चल जाता है कि डीबीटी का पैसा किस बैंक खाते में जाएगा. माई आधार पोर्टल पर बैंक सीडिंग स्टेटस खोलिए, फिर उसी बैंक के खाते का बैलेंस या मिनी स्टेटमेंट देखिए.
शहरी आवेदन की संख्या खो गई, अब क्या करें?
आवेदन के समय आधार से जुड़े मोबाइल पर आए संदेश देखिए. संख्या न मिले तो अपने क्षेत्र स्तरीय संगठन यानी एएलओ या सीआरपी से संपर्क कीजिए, वे आधार नंबर से रिकॉर्ड खोज सकते हैं. दोबारा फॉर्म भरने से पहले उनसे जरूर पूछिए.
स्टेटस में सब ठीक है फिर भी 10,000 रुपये नहीं आए तो क्या करें?
पहले यह पक्का कीजिए कि आप सही खाता देख रही हैं, क्योंकि पैसा उसी खाते में आता है जो आधार से डीबीटी के लिए जुड़ा है. खाता सही हो तो जीविका या नगर निकाय से भुगतान सूची के बारे में पूछिए. लंबे समय तक सुनवाई न हो तो बिहार लोक शिकायत निवारण पोर्टल पर शिकायत कीजिए.
क्या स्टेटस देखने के लिए किसी को फीस देनी होती है?
नहीं. माई आधार पोर्टल, बैंक का बैलेंस और समूह से जानकारी, तीनों के लिए योजना की ओर से कोई फीस नहीं है. कोई स्टेटस दिखाने के नाम पर ओटीपी, पिन या पैसे मांगे, तो वह ठगी है.
निष्कर्ष
Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana status check kaise kare, इसका जवाब एक वेबसाइट में नहीं, तीन कदमों में है. पहले शहरी महिलाएं अपनी आवेदन संख्या और एएलओ या सीआरपी से, ग्रामीण महिलाएं समूह और ग्राम संगठन से सत्यापन की स्थिति पूछें. दूसरा, माई आधार पोर्टल पर देखें कि आधार किस बैंक से डीबीटी के लिए जुड़ा है. तीसरा, उसी खाते की पासबुक, मिनी स्टेटमेंट या बैंक ऐप से पैसा आया या नहीं, यह पक्का करें.
आज ही अपना आधार से जुड़ा मोबाइल, पासबुक और आवेदन संख्या एक जगह रख लीजिए. सीडिंग में गड़बड़ी दिखे तो बैंक जाइए, खाता सही हो तो जीविका या नगर निकाय से पूछिए, और जवाब न मिले तो लोक शिकायत पोर्टल का रास्ता अपनाइए.
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी और जागरूकता के लिए है. योजना के नियम, किस्त की रकम, पोर्टल और प्रक्रिया सरकार बदल सकती है. कोई भी कदम उठाने से पहले योजना की आधिकारिक वेबसाइट, जीविका कार्यालय, नगर निकाय या अपने बैंक से पुष्टि जरूर कर लें.








