सोने में पैसा लगाना है, लेकिन Demat अकाउंट नहीं है और ज्वेलरी की मेकिंग चार्ज या शुद्धता की चिंता भी नहीं चाहिए. ऐसे में सबसे आम सवाल यही होता है कि Best Gold Mutual Funds कौन से हैं और इनमें टैक्स कैसे लगता है.
इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि गोल्ड म्यूचुअल फंड असल में काम कैसे करता है, 2026 में बाजार में मौजूद प्रमुख गोल्ड फंड कौन से हैं, फंड चुनते समय Expense Ratio और Tracking Error क्यों देखें, और 1 अप्रैल 2025 के बाद लागू टैक्स नियम Gold ETF से कैसे अलग हैं.
यहां किसी फंड की खरीद की सलाह नहीं दी जा रही है. रिटर्न और खर्च के ताज़ा आंकड़े हमेशा फंड हाउस की Factsheet या AMFI की वेबसाइट पर ही देखें, क्योंकि ये हर महीने बदलते हैं.
मुख्य जानकारी एक नज़र में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| क्या है | Gold ETF में निवेश करने वाला Fund of Funds (FoF) |
| किसके लिए | जिनके पास Demat अकाउंट नहीं है या जो SIP से सोना जोड़ना चाहते हैं |
| निवेश का तरीका | SIP या एकमुश्त, AMC की वेबसाइट, ऐप या MF Distributor से |
| टैक्स (1 अप्रैल 2025 से बिक्री पर) | 24 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर 12.5% LTCG, उससे कम पर स्लैब रेट |
| NAV कहां देखें | AMFI NAV पेज |
| रेगुलेटर | SEBI |
| आखिरी अपडेट | 29 अक्टूबर 2026 |

गोल्ड म्यूचुअल फंड क्या होता है
भारत में ज्यादातर गोल्ड म्यूचुअल फंड Fund of Funds होते हैं. यानी जब आप इनमें पैसा लगाते हैं, तो फंड हाउस वह पैसा अपने ही Gold ETF की यूनिट्स खरीदने में लगाता है. Gold ETF के पीछे फिजिकल सोना रखा जाता है, इसलिए फंड की NAV सोने के घरेलू भाव के साथ ऊपर-नीचे होती है.
सीधी बात यह है कि आप सोने की कीमत में होने वाले बदलाव का फायदा या नुकसान उठाते हैं, लेकिन सोना घर में रखने, उसकी शुद्धता जांचने या लॉकर का खर्च उठाने की ज़रूरत नहीं पड़ती. ये स्कीम SEBI के नियमों के तहत चलती हैं.

गोल्ड फंड कैसे काम करता है: पूरा प्रोसेस
- आप SIP या एकमुश्त रकम गोल्ड फंड में जमा करते हैं.
- फंड हाउस (AMC) उस पैसे से अपने Gold ETF की यूनिट्स खरीदता है.
- Gold ETF उतनी ही कीमत का फिजिकल सोना रखता है.
- हर कारोबारी दिन के अंत में फंड की NAV तय होती है और आपको उसी NAV पर यूनिट्स मिलती हैं.
Gold ETF शेयर बाजार में दिन भर ट्रेड होता है, इसलिए कभी-कभी उसका भाव असली वैल्यू से थोड़ा ऊपर या नीचे (प्रीमियम या डिस्काउंट) चला जाता है. गोल्ड फंड में आपका लेन-देन दिन के अंत की NAV पर होता है, इसलिए यह झंझट सीधे आप पर नहीं आता.
यह भी पढ़ें: Gold SIP 2026: अभी निवेश करना सही है या नहीं
Best Gold Mutual Funds 2026: प्रमुख फंड की लिस्ट
नीचे वे प्रमुख घरेलू गोल्ड फंड हैं जो बड़े फंड हाउस चलाते हैं. सभी का पैसा आखिरकार सोने में ही जाता है, इसलिए लंबी अवधि में इनके रिटर्न आमतौर पर एक-दूसरे के काफी करीब रहते हैं. असली फर्क Expense Ratio, Tracking Error और Exit Load से पड़ता है.
| फंड का नाम | किसमें निवेश करता है |
|---|---|
| SBI Gold Fund | SBI Gold ETF |
| HDFC Gold ETF Fund of Fund | HDFC Gold ETF |
| Nippon India Gold Savings Fund | Nippon India ETF Gold BeES |
| Kotak Gold Fund | Kotak Gold ETF |
| ICICI Prudential Regular Gold Savings Fund (FOF) | ICICI Prudential Gold ETF |
| Axis Gold Fund | Axis Gold ETF |
| Aditya Birla Sun Life Gold Fund | Aditya Birla Sun Life Gold ETF |
| Quantum Gold Savings Fund | Quantum Gold Fund (ETF) |
इस लिस्ट का क्रम किसी रैंकिंग को नहीं दिखाता. पहले इस लेख में कुछ फंड के लिए 100% से ज्यादा के 1 साल के रिटर्न और गलत Expense Ratio लिखे थे, जो सत्यापित नहीं थे, इसलिए उन्हें हटा दिया गया है. किसी भी फंड का मौजूदा रिटर्न और खर्च उसकी ताज़ा Factsheet में देखें.
DSP World Gold Mining जैसे फंड सोने में नहीं, बल्कि विदेशी गोल्ड माइनिंग कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं. इनका जोखिम सामान्य गोल्ड फंड से काफी ज्यादा होता है और ये इस लिस्ट की श्रेणी में नहीं आते.

सही गोल्ड फंड कैसे चुनें
- Expense Ratio: FoF में दो स्तर का खर्च होता है, फंड का और नीचे वाले ETF का. Direct Plan का कुल खर्च जितना कम, उतना बेहतर.
- Tracking Error: यह बताता है कि फंड का रिटर्न सोने के भाव से कितना भटकता है. कम Tracking Error वाला फंड बेहतर माना जाता है.
- AUM और फंड हाउस: बड़े AUM वाले फंड में आमतौर पर लिक्विडिटी अच्छी रहती है.
- Exit Load: कई गोल्ड फंड में तय अवधि से पहले पैसा निकालने पर Exit Load लगता है. यह स्कीम डॉक्यूमेंट में लिखा होता है.
- Direct बनाम Regular Plan: Direct Plan में कमीशन नहीं होता, इसलिए खर्च कम रहता है.
अपने सभी म्यूचुअल फंड एक जगह ट्रैक करने के लिए MF Central App काम आ सकता है.
Gold Mutual Fund बनाम Gold ETF: टैक्स और बाकी फर्क
Finance Act 2024 के बाद गोल्ड फंड और Gold ETF पर टैक्स के नियम बदले. 1 अप्रैल 2025 या उसके बाद बेची गई यूनिट्स पर दोनों में LTCG की दर 12.5% (बिना Indexation) है, लेकिन होल्डिंग पीरियड अलग है.
| बिंदु | Gold Mutual Fund (FoF) | Gold ETF |
|---|---|---|
| Demat अकाउंट | ज़रूरी नहीं | ज़रूरी |
| कीमत | दिन के अंत की NAV | बाजार में रियल टाइम भाव |
| SIP | आसान, सीधे AMC से | ब्रोकर ऐप के फीचर पर निर्भर |
| Long Term कब | 24 महीने से ज्यादा | 12 महीने से ज्यादा |
| LTCG टैक्स | 12.5% | 12.5% |
| Short Term मुनाफा | स्लैब रेट पर | स्लैब रेट पर |
| खर्च | आमतौर पर थोड़ा ज्यादा | आमतौर पर कम, पर ब्रोकरेज लगता है |

स्लैब रेट और ₹12 लाख की रिबेट: टैक्स का गणित समझें
गोल्ड फंड को 24 महीने से पहले बेचने पर मुनाफा Short Term माना जाता है और यह आपकी सामान्य आय में जुड़कर स्लैब रेट पर टैक्स होता है. Budget 2026 में नई टैक्स व्यवस्था के स्लैब नहीं बदले गए और ₹12 लाख तक की टैक्सेबल आय पर Section 87A की रिबेट जारी है.
मान लीजिए किसी की सैलरी और गोल्ड फंड का Short Term मुनाफा मिलाकर कुल टैक्सेबल आय नई व्यवस्था में ₹12 लाख से कम है. ऐसे में रिबेट के कारण उस पर टैक्स शून्य हो सकता है. वहीं 12.5% वाले LTCG जैसी विशेष दर वाली आय पर यह रिबेट नहीं मिलती, यह बात ध्यान रखें.
टैक्स की स्थिति हर व्यक्ति के लिए अलग होती है. 1 अप्रैल 2026 से नया Income-tax Act, 2025 भी लागू हो चुका है, इसलिए बड़ी रकम बेचने से पहले Income Tax विभाग की गाइड देखें या किसी टैक्स सलाहकार से बात करें.
गोल्ड फंड में निवेश कैसे शुरू करें
- PAN और Aadhaar से अपना KYC पूरा करें. KYC एक बार होने के बाद सभी फंड हाउस में चलता है.
- फंड चुनें और उसकी Factsheet में Expense Ratio, Tracking Error और Exit Load देखें.
- AMC की वेबसाइट, ऐप या किसी रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म पर Direct Plan चुनें.
- SIP की रकम और तारीख तय करें और AutoPay या Mandate सेट करें.
- कम से कम 3 से 5 साल का नज़रिया रखें और साल में एक बार पोर्टफोलियो देखें.
SIP का पूरा तरीका विस्तार से समझने के लिए SIP Kaise Kare: Beginners Guide पढ़ें.
पोर्टफोलियो में सोना कितना रखें और आम गलतियां
सोना आमतौर पर महंगाई और बाजार की गिरावट के समय सहारा देने वाला एसेट माना जाता है, लेकिन यह नियमित आय नहीं देता. इसलिए कई वित्तीय योजनाकार इसे पूरे पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा रखने की बात करते हैं. सही अनुपात आपकी उम्र, लक्ष्य और जोखिम क्षमता पर निर्भर करता है.
- पिछले साल के तेज़ रिटर्न देखकर एक साथ बड़ी रकम लगा देना.
- भाव गिरने पर घबराकर SIP बंद कर देना.
- Regular Plan चुनकर बिना वजह ज्यादा खर्च देना.
- Exit Load और टैक्स की अवधि देखे बिना जल्दी पैसा निकालना.
बिहार के कई परिवारों में शादी-ब्याह के लिए सोना जोड़ने की परंपरा है. ऐसे लक्ष्य के लिए गोल्ड फंड में SIP एक व्यवस्थित तरीका हो सकता है, क्योंकि ज़रूरत के समय यूनिट्स बेचकर पैसा सीधे बैंक खाते में आ जाता है. अगर आप एक ही फंड में Equity, Debt और Gold चाहते हैं तो Multi Asset Funds भी देख सकते हैं.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Best Gold Mutual Funds में निवेश के लिए Demat अकाउंट ज़रूरी है क्या?
नहीं. गोल्ड म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए Demat अकाउंट की ज़रूरत नहीं होती. KYC पूरा करके AMC की वेबसाइट, ऐप या रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म से SIP या एकमुश्त निवेश किया जा सकता है.
गोल्ड फंड पर कितना टैक्स लगता है?
1 अप्रैल 2025 या उसके बाद बेची गई यूनिट्स पर, 24 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर 12.5% LTCG लगता है. 24 महीने से पहले बेचने पर मुनाफा आपकी आय में जुड़कर स्लैब रेट पर टैक्स होता है.
Gold ETF और Gold Fund में से कौन बेहतर है?
जिनके पास Demat अकाउंट है और जो खुद ट्रेड करना जानते हैं, उनके लिए Gold ETF का खर्च आमतौर पर कम होता है. बिना Demat के SIP करना हो तो Gold Fund आसान है. Gold ETF 12 महीने बाद और Gold Fund 24 महीने बाद Long Term माना जाता है.
क्या गोल्ड फंड सुरक्षित है?
ये SEBI रेगुलेटेड स्कीम हैं और इनका पैसा फिजिकल सोने से जुड़े Gold ETF में जाता है. फिर भी सोने का भाव गिरने पर NAV घटती है, इसलिए इसमें बाजार जोखिम रहता है.
गोल्ड फंड का ताज़ा रिटर्न और Expense Ratio कहां देखें?
हर फंड हाउस अपनी वेबसाइट पर मासिक Factsheet जारी करता है. NAV की जानकारी AMFI की वेबसाइट पर भी मिलती है.
निष्कर्ष
Best Gold Mutual Funds उन निवेशकों के लिए आसान रास्ता हैं जो बिना Demat अकाउंट के SIP से सोना जोड़ना चाहते हैं. घरेलू गोल्ड फंड का रिटर्न सोने के भाव पर टिका होता है, इसलिए फंड चुनते समय Expense Ratio, Tracking Error और Exit Load पर ध्यान दें, न कि पिछले साल के रिटर्न पर.
टैक्स के लिहाज़ से याद रखें कि गोल्ड फंड 24 महीने बाद और Gold ETF 12 महीने बाद Long Term होता है, और दोनों पर LTCG 12.5% है. सोने को पोर्टफोलियो का संतुलित हिस्सा रखें और लंबी अवधि का नज़रिया अपनाएं.
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है और निवेश की सलाह नहीं है. म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, स्कीम से जुड़े सभी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें. टैक्स नियम बदल सकते हैं, निवेश से पहले SEBI रजिस्टर्ड सलाहकार या टैक्स विशेषज्ञ से सलाह लें.






