Apple, Nvidia या Microsoft के शेयरों की खबरें रोज़ आती हैं और बहुत से भारतीय निवेशक सोचते हैं कि क्या वे भी इनमें पैसा लगा सकते हैं. सवाल कई हैं: यह legal है या नहीं, कितना पैसा भेज सकते हैं, TCS क्यों कटता है और टैक्स कैसे लगेगा.
US Market me Trade Kaise Kare, इसका सीधा जवाब है कि भारत का resident व्यक्ति RBI की Liberalised Remittance Scheme (LRS) के तहत विदेशी शेयरों में निवेश कर सकता है. लेकिन इसके कुछ साफ नियम हैं, और पुराने लेख में LRS की limit, settlement और टैक्स से जुड़ी कई बातें गलत लिखी थीं, जिन्हें इस गाइड में आधिकारिक स्रोतों से ठीक किया गया है.
यहां आप जानेंगे कि पैसा भेजने से लेकर शेयर खरीदने और ITR में दिखाने तक पूरा process क्या है, किन गलतियों से account पर रोक लग सकती है और बिहार के छोटे निवेशक कम रकम से शुरुआत कैसे कर सकते हैं.
इस लेख में आप जानेंगे
✔ LRS की सही limit: हर financial year में USD 2,50,000 प्रति व्यक्ति
✔ TCS का नियम: ₹10 लाख तक नहीं, उसके ऊपर 20% और ITR में उसका adjustment
✔ US Market me Trade Kaise Kare: account खोलने से निवेश तक 5 steps
✔ US में T+1 settlement, Good Faith Violation और उससे बचाव
✔ Dividend, STCG, LTCG टैक्स और Schedule FA में reporting
ताज़ा अपडेट (30 अक्टूबर 2026)

Union Budget 2026 में LRS के तहत निवेश के लिए भेजे गए पैसे पर TCS नियम नहीं बदले: एक financial year में ₹10 लाख तक TCS नहीं और उसके ऊपर 20%. Budget में छह महीने की एक Foreign Asset Disclosure Scheme की घोषणा हुई है, जो पहले से छुपाई गई विदेशी संपत्ति को नियमित करने के लिए है. हर साल ITR में Schedule FA भरना पहले की तरह ज़रूरी है.
| मुख्य जानकारी एक नज़र में | विवरण |
|---|---|
| किसके लिए | भारत के resident individual (नाबालिग भी, अभिभावक के ज़रिए) |
| LRS limit | USD 2,50,000 प्रति व्यक्ति प्रति financial year (अप्रैल से मार्च) |
| ज़रूरी दस्तावेज़ | PAN (अनिवार्य), Form A2, KYC, विदेशी broker के लिए W-8BEN |
| TCS (निवेश के लिए) | ₹10 लाख तक शून्य, उससे ऊपर की राशि पर 20% |
| मना है | विदेशी exchange को margin या margin call का भुगतान, विदेश में foreign exchange trading |
| US settlement | T+1 (28 मई 2024 से) |
| आधिकारिक स्रोत | RBI LRS FAQ, incometax.gov.in |
| आखिरी अपडेट | 30 अक्टूबर 2026 |
US Market me Trade Kaise Kare: पहले LRS को समझें
RBI के LRS FAQ के अनुसार भारत का कोई भी resident individual, नाबालिग समेत, एक financial year में USD 2,50,000 तक विदेश भेज सकता है. यह पैसा current account या capital account के अनुमत कामों के लिए हो सकता है, जिसमें विदेशी शेयरों में निवेश भी शामिल है. कंपनियां, partnership firm, HUF और trust इस योजना के पात्र नहीं हैं.
पुराने लेख में यह limit “$5 लाख” लिखी थी, जो गलत थी. सही limit USD 2,50,000 है. यह हर व्यक्ति के लिए अलग है, यानी परिवार के अलग-अलग सदस्य अपनी-अपनी limit इस्तेमाल कर सकते हैं, बशर्ते पैसा उनका अपना हो और उनके अपने PAN से भेजा जाए.
LRS के तहत हर transaction के लिए PAN देना अनिवार्य है. बैंक Form A2 पर आपसे भुगतान का purpose लिखवाता है. RBI साफ कहता है कि बैंक आपके declaration पर भरोसा करता है, लेकिन नियमों का पालन करने की ज़िम्मेदारी आपकी है.
LRS में क्या मना है
- विदेशी exchange या counterparty को margin या margin call के लिए पैसा भेजना.
- विदेश में foreign exchange (currency) trading करना.
- FATF द्वारा non-cooperative बताए गए देशों में capital account remittance.
- एक resident द्वारा दूसरे resident को विदेशी खाते में foreign currency gift देना.
इसका मतलब है कि leverage या margin वाले trading products LRS के दायरे में नहीं आते. Forex trading के नाम पर चल रहे ऐप और वेबसाइट से दूर रहें. RBI समय-समय पर ऐसे अनधिकृत forex platforms की Alert List भी जारी करता है.

TCS का नियम: कितना कटेगा और वापस कैसे मिलेगा
जब आप बैंक या authorised dealer के ज़रिए निवेश के लिए पैसा विदेश भेजते हैं, तो एक financial year में कुल ₹10 लाख तक कोई TCS (Tax Collected at Source) नहीं लगता. ₹10 लाख से ऊपर जितनी राशि भेजी जाती है, उस पर 20% TCS कटता है. Budget 2026 में इस नियम में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
| एक साल में भेजी गई कुल राशि | TCS किस पर | TCS राशि |
|---|---|---|
| ₹5 लाख | कुछ नहीं | ₹0 |
| ₹10 लाख | कुछ नहीं | ₹0 |
| ₹15 लाख | ₹10 लाख से ऊपर के ₹5 लाख पर 20% | ₹1,00,000 |
| ₹20 लाख | ₹10 लाख से ऊपर के ₹10 लाख पर 20% | ₹2,00,000 |
TCS कोई अलग टैक्स नहीं है. यह आपके PAN पर जमा होता है और Form 26AS या AIS में दिखता है. ITR भरते समय यह आपकी कुल tax liability से घटाया जाता है. अगर आपकी liability कम है तो बची हुई राशि refund के रूप में मिलती है. हां, पैसा कुछ महीनों के लिए फंसा रहता है, इसलिए बड़ी रकम भेजने से पहले cash flow की योजना बनाएं.
कौन से रास्ते से US शेयर खरीदे जा सकते हैं
भारत से US शेयरों में निवेश के दो आम रास्ते हैं. पहला, LRS के तहत पैसा भेजकर विदेशी broker में खाता खोलना, जो सीधे या किसी भारतीय ऐप के ज़रिए हो सकता है. दूसरा, GIFT City के NSE IFSC प्लेटफॉर्म पर चुने हुए US शेयरों के unsponsored depository receipts खरीदना, जिसमें भी पैसा LRS के तहत ही भेजा जाता है.
| बिंदु | विदेशी broker (सीधे या भारतीय ऐप से) | NSE IFSC (GIFT City) |
|---|---|---|
| पैसा कैसे जाता है | LRS के तहत, बैंक से USD में | LRS के तहत, IFSC खाते में |
| शेयरों का विकल्प | आमतौर पर हज़ारों US शेयर और ETF | सीमित, चुने हुए US शेयर |
| Regulation | US में SEC/FINRA, खाता SIPC के दायरे में हो सकता है | भारत में IFSCA |
| TCS और टैक्स | LRS के नियम लागू | LRS के नियम लागू |
| किसके लिए ठीक | लंबी अवधि का निवेश, ETF | जो भारत की regulated व्यवस्था पसंद करते हैं |
कोई भी ऐप चुनने से पहले देखें कि असली broker कौन है, वह किस regulator के तहत है और आपका पैसा किस entity के पास रहेगा. Instagram या Telegram पर “US stocks में गारंटीड return” का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति पर भरोसा न करें.
US Market me Trade Kaise Kare: Step-by-Step तरीका
नीचे के steps विदेशी broker वाले LRS रास्ते के लिए हैं. हर platform के बटन के नाम थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन process यही रहता है.
Step 1: Platform और broker की जांच करें
पहले तय करें कि आप किस ऐप या broker से निवेश करेंगे. देखें कि असली US broker SEC में registered और FINRA का सदस्य है या नहीं, और खाता SIPC के दायरे में आता है या नहीं. ऐप की fee list में account fee, brokerage, currency conversion और withdrawal charge ज़रूर पढ़ें.

Step 2: KYC पूरा करें और W-8BEN भरें
Sign up करके PAN, पता और पहचान के दस्तावेज़ upload करें. ज़्यादातर platform Aadhaar आधारित e-KYC और selfie verification करते हैं. इसके बाद US टैक्स के लिए W-8BEN form भरा जाता है, जिससे भारत-US टैक्स संधि के तहत dividend पर 25% की दर से टैक्स कटता है.

Step 3: बैंक से LRS के तहत पैसा भेजें
Platform आपको अपने broker का बैंक विवरण देता है. अपने बैंक की net banking में Outward Remittance या Foreign Remittance विकल्प से, या शाखा जाकर, Form A2 और LRS declaration के साथ पैसा भेजें. Purpose में overseas portfolio investment चुनें. ₹10 लाख से ऊपर की राशि पर बैंक 20% TCS काटेगा.

Step 4: Settled cash से शेयर या ETF खरीदें
पैसा broker खाते में आने के बाद stock या ETF का नाम search करें, राशि या शेयरों की संख्या डालें और Buy पर tap करें. कई platform fractional shares देते हैं, यानी आप पूरे शेयर के बजाय छोटी रकम से भी खरीद सकते हैं. बेचने के बाद मिला पैसा T+1 पर settle होता है, इसलिए cash account में उसी unsettled पैसे से बार-बार खरीद-बिक्री से बचें.

Step 5: रिकॉर्ड रखें और ITR में सही reporting करें
हर साल broker का annual statement, dividend और टैक्स कटौती का विवरण (US Form 1042-S) download करके रखें. भारत में ITR भरते समय विदेशी शेयरों को Schedule FA में दिखाएं, capital gains और dividend को income में जोड़ें और US में कटे टैक्स का credit लेने के लिए Form 67 समय पर भरें.

भारत से LRS के तहत US शेयरों में निवेश करने का आसान तरीका.
Platform और broker की जांच करें
देखें कि broker SEC में registered, FINRA सदस्य और SIPC के दायरे में है, और fee list पढ़ें.
KYC और W-8BEN पूरा करें
PAN और पहचान दस्तावेज़ से KYC करें और US टैक्स के लिए W-8BEN form भरें.
LRS के तहत पैसा भेजें
बैंक के Outward Remittance विकल्प से Form A2 के साथ पैसा भेजें और TCS का ध्यान रखें.
Settled cash से खरीदें
Stock या ETF चुनकर Buy करें और unsettled पैसे से बार-बार trading न करें.
ITR में reporting करें
Schedule FA भरें, income दिखाएं और foreign tax credit के लिए Form 67 जमा करें.
T+1 settlement और Good Faith Violation से कैसे बचें
US में 28 मई 2024 से ज़्यादातर शेयर सौदों का settlement T+1 हो गया है, यानी सौदे के अगले कामकाजी दिन. यह जानकारी Investor.gov (SEC) के bulletin में दी गई है. पुराने लेख में T+2 लिखा था, जो अब लागू नहीं है.
Cash account में अगर आप ऐसे पैसे से शेयर खरीदते हैं जो अभी settle नहीं हुआ और फिर उस शेयर को उस पैसे के settle होने से पहले बेच देते हैं, तो इसे Good Faith Violation (GFV) कहा जाता है. FINRA की settlement गाइड भी cash account में इसी तरह की पाबंदियों के बारे में बताती है.
कई broker की policy के अनुसार 12 महीनों में तीन GFV होने पर खाते पर 90 दिन की पाबंदी लगती है, जिसमें आप सिर्फ पूरी तरह settled cash से ही खरीद सकते हैं. पुराने लेख में लिखा था कि इस दौरान खरीदारी बिल्कुल बंद हो जाती है, जो सही नहीं है. सबसे आसान बचाव यही है कि खरीदारी हमेशा settled पैसे से करें.

US शेयरों पर टैक्स: Dividend, STCG और LTCG
भारत का resident अपनी पूरी दुनिया की कमाई पर भारत में टैक्स देता है. US शेयरों की कमाई तीन तरह से टैक्स होती है.
| कमाई | शर्त | भारत में टैक्स | ध्यान दें |
|---|---|---|---|
| Dividend | जब भी मिले | आपके slab rate पर | US में W-8BEN के साथ 25% कटता है, Form 67 से credit |
| STCG | 24 महीने या कम holding | आपके slab rate पर | Equity के ₹1.25 लाख वाले exemption जैसा लाभ नहीं |
| LTCG | 24 महीने से ज़्यादा holding | 12.5%, बिना indexation | 23 जुलाई 2024 के बाद की बिक्री पर |
ध्यान रखें कि भारतीय listed शेयरों पर LTCG की ₹1.25 लाख तक की छूट विदेशी शेयरों पर लागू नहीं होती. पुराने लेख में भारतीय शेयरों के लिए ₹1 लाख की छूट लिखी थी, जो अब ₹1.25 लाख है. गणना रुपये में होती है, इसलिए खरीद और बिक्री के समय की exchange rate का असर भी आपके gain पर पड़ता है.
मान लीजिए आपने ₹1,00,000 के US शेयर खरीदे और वे बढ़कर ₹1,50,000 के हो गए. 30% slab वाले व्यक्ति के लिए 24 महीने से पहले बेचने पर ₹50,000 के gain पर 30% यानी ₹15,000 और 4% cess के साथ करीब ₹15,600 टैक्स बनेगा. 24 महीने के बाद बेचने पर 12.5% यानी ₹6,250 और cess के साथ करीब ₹6,500 टैक्स बनेगा. Surcharge अलग से लग सकता है.
Schedule FA: विदेशी शेयर ITR में दिखाना क्यों ज़रूरी है
Income Tax Department के ITR forms में resident व्यक्ति को अपनी विदेशी संपत्ति Schedule FA में दिखानी होती है, भले ही उस पर कोई कमाई न हुई हो. Schedule FA में जानकारी calendar year (1 जनवरी से 31 दिसंबर) के आधार पर दी जाती है, जबकि आपकी income financial year के आधार पर दिखाई जाती है. इस अंतर को समझकर ही ITR भरें.
विदेशी संपत्ति छुपाने पर Black Money Act के तहत भारी penalty और कार्रवाई हो सकती है. Budget 2026 में घोषित Foreign Asset Disclosure Scheme उन लोगों के लिए है जिन्होंने पहले ऐसी संपत्ति नहीं दिखाई. सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि पहले साल से ही सही reporting करें. ज़रूरत हो तो foreign asset reporting जानने वाले Chartered Accountant की मदद लें.

फायदे, जोखिम और बिहार के निवेशकों के लिए सलाह
| फायदे | जोखिम |
|---|---|
| दुनिया की बड़ी कंपनियों में सीधा निवेश | रुपया-डॉलर दर बदलने से return घट या बढ़ सकता है |
| भारतीय portfolio के साथ diversification | TCS से पैसा कुछ समय फंसता है |
| Fractional shares से छोटी रकम से शुरुआत | Platform, conversion और withdrawal fees |
| ETF के ज़रिए पूरे index में निवेश | Schedule FA और Form 67 की compliance |
बिहार के ज़्यादातर नए निवेशकों के लिए समझदारी यही है कि पहले भारत में emergency fund और बुनियादी निवेश तैयार करें, उसके बाद portfolio का छोटा हिस्सा ही विदेशी शेयरों में लगाएं. एक-एक शेयर चुनने के बजाय कम खर्च वाले index ETF से शुरुआत करना आसान रहता है.
शेयर बाज़ार की बुनियादी समझ के लिए हमारा Stock Market Kya Hai गाइड पढ़ें. जल्दी अमीर बनाने वाले दावों से बचने के लिए Penny Stocks की सच्चाई और Multibagger Stocks पहचानने का तरीका भी उपयोगी हैं.
💡 प्रो टिप: हर साल जनवरी में अपने broker का 31 दिसंबर तक का statement download कर लें. Schedule FA calendar year के हिसाब से भरी जाती है, इसलिए यही statement ITR के समय सबसे ज़्यादा काम आता है.
यह भी पढ़ें: Sahi App Review 2026: Brokerage, Charges, Account और जोखिम
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
US Market me Trade Kaise Kare, क्या भारत से US शेयर खरीदना legal है?
हां. भारत का resident individual RBI की Liberalised Remittance Scheme के तहत हर financial year में USD 2,50,000 तक विदेश भेजकर विदेशी शेयरों में निवेश कर सकता है. इसके लिए PAN और Form A2 ज़रूरी है.
LRS की limit कितनी है?
USD 2,50,000 प्रति व्यक्ति प्रति financial year, जो अप्रैल से मार्च तक गिनी जाती है. इसमें निवेश, पढ़ाई, यात्रा जैसे सभी LRS खर्च शामिल होते हैं.
US शेयरों के लिए पैसा भेजने पर TCS कितना लगता है?
एक financial year में ₹10 लाख तक कोई TCS नहीं लगता. उससे ऊपर की राशि पर 20% TCS लगता है, जिसे ITR में tax liability से adjust या refund के रूप में वापस पाया जा सकता है.
क्या US शेयरों में margin या leverage से trading कर सकते हैं?
RBI के LRS FAQ के अनुसार विदेशी exchange या counterparty को margin या margin call के लिए पैसा भेजना मना है. विदेश में foreign exchange trading भी मना है.
US शेयरों पर LTCG टैक्स कितना है?
24 महीने से ज़्यादा रखने के बाद बेचने पर 12.5% LTCG टैक्स बिना indexation के लगता है. 24 महीने या कम में बेचने पर gain आपके slab rate पर टैक्स होता है.
Schedule FA न भरने पर क्या होगा?
विदेशी संपत्ति ITR में न दिखाने पर Black Money Act के तहत भारी penalty और कार्रवाई हो सकती है. इसलिए हर साल Schedule FA में विदेशी शेयर और खाते दिखाएं.
निष्कर्ष
US Market me Trade Kaise Kare, इसका जवाब नियमों को समझने में है. LRS के तहत USD 2,50,000 तक की सालाना limit, ₹10 लाख के बाद 20% TCS, T+1 settlement, 24 महीने के बाद 12.5% LTCG और हर साल Schedule FA, ये पांच बातें याद रखें तो विदेशी निवेश आसान और सुरक्षित रहता है.
छोटी रकम, भरोसेमंद platform और लंबी अवधि की सोच के साथ शुरुआत करें. किसी भी तरह के margin, forex या “गारंटीड return” वाले ऑफर से दूर रहें.
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के लिए है, यह निवेश या टैक्स सलाह नहीं है. LRS, TCS और टैक्स नियम RBI, Income Tax Department और SEC के आधिकारिक स्रोतों से 30 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी पर आधारित हैं और बदल सकते हैं. विदेशी निवेश में currency और बाज़ार जोखिम होता है. निवेश से पहले SEBI-registered सलाहकार या CA से सलाह लें.









